78% शहरी आबादी पर कीटनाशक अवशेषों का प्रभाव, खून के सैंपल में कई प्रकार के विषैले तत्व पाए गए,रिपोर्ट में खुलासा

यह रासायनिक तत्व प्रजनन क्षमता में कमी, थायरॉयड रोग, हार्मोन दमन, उच्च कोलेस्ट्रॉल, जिगर की क्षति और अल्सरेटिव कोलाइटिस से जुड़े होते हैं।

भारत में शहरी क्षेत्रों की 78 प्रतिशत आबादी को कीटनाशक अवशेषों से संपर्क में पाया गया है, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकते हैं, यह जानकारी बेंगलुरू स्थित गट हेल्थ स्टार्टअप माइक्रोबायोटेक्स के नवीनतम अध्ययन में सामने आई है। यह निष्कर्ष 200 भारतीय रक्त के नमूनों के विश्लेषण पर आधारित हैं, जिनका उद्देश्य छिपे हुए रासायनिक संपर्कों, जैसे कीटनाशक, एंटीबायोटिक, स्टेरॉयड और “फॉरेवर केमिकल्स” की पहचान करना था, जो स्वास्थ्य पर चुपचाप प्रभाव डाल सकते हैं।

अध्यान के अनुसार, 78 प्रतिशत परीक्षण किए गए लोगों में कीटनाशक अवशेष पाए गए, जिसमें से 36 प्रतिशत लोग तीन या अधिक कीटनाशकों के संपर्क में थे, जो गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों का संकेत देते हैं। अध्ययन में कहा गया, “इन परिणामों से यह स्पष्ट होता है कि विषैले तत्वों का शरीर में प्रवेश भोजन, प्लास्टिक उपयोग, भूमिगत जल और पर्यावरणीय प्रदूषण के माध्यम से हो रहा है।”

इसके अलावा, 54 प्रतिशत नमूनों में एंटीबायोटिक की उपस्थिति देखी गई। अध्ययन ने बताया कि इस तरह के संपर्क एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस, कठिनाई से ठीक होने वाली संक्रमण, और गट माइक्रोबायोम के विकारों से जुड़ा हुआ है, जो मेटाबोलिक डिसऑर्डर का कारण बन सकते हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि 39 प्रतिशत परीक्षण किए गए लोग स्टेरॉयड्स के संपर्क में थे, जो एंडोक्राइन विकार और कैंसर के बढ़ते जोखिम का कारण बन सकते हैं। वहीं, 38 प्रतिशत लोगों में “फॉरेवर केमिकल्स” पाए गए, जो स्थायी विषैले तत्व होते हैं और कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। यह रासायनिक तत्व प्रजनन क्षमता में कमी, थायरॉयड रोग, हार्मोन दमन, उच्च कोलेस्ट्रॉल, जिगर की क्षति और अल्सरेटिव कोलाइटिस से जुड़े होते हैं।

विशेष रूप से, 17 प्रतिशत नमूनों में तीन श्रेणियों में 10 या उससे अधिक विषैले तत्व पाए गए, जो छिपे हुए और दीर्घकालिक संपर्क को दर्शाता है।

माइक्रोबायोटेक्स ने हाल ही में अपनी नई विषैली तत्वों का पता लगाने की क्षमता के तहत, भारत के 9 राज्यों और 14 शहरों से शहरी आबादी के नमूनों का विश्लेषण किया। इस विश्लेषण में कीटनाशकों, कीटाणुनाशकों, एंटीबायोटिक, स्टेरॉयड ग्रोथ रेगुलेटर्स और फॉरेवर केमिकल्स से संबंधित महत्वपूर्ण संपर्क सामने आए हैं।

हालांकि कीटनाशकों, एंटीबायोटिक और स्टेरॉयड के स्वास्थ्य जोखिमों के बारे में जागरूकता बढ़ रही है, अध्ययन में यह भी बताया गया कि फॉरेवर केमिकल्स के बारे में अधिकांश लोग अवगत नहीं हैं। फॉरेवर केमिकल्स सिंथेटिक, मानव निर्मित पदार्थ होते हैं, जो अपने जल, गर्मी और चिकनाई-प्रतिरोधी गुणों के कारण नॉन-स्टिक कुकवेयर, खाद्य पैकेजिंग और जल प्रतिरोधी कपड़ों और कोटिंग्स जैसे उत्पादों में व्यापक रूप से उपयोग होते हैं। अध्ययन में यह भी उल्लेख किया गया कि इनमें से कई यौगिकों का उपयोग प्रतिबंधित है क्योंकि यह मनुष्यों में गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा करते हैं।

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