
वाराणसी : गंगा बैराज से छोड़े जा रहे पानी से वाराणसी और प्रयागराज में गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। गंगा का जलस्तर में हुई वृद्धि के वजह से काशी के सभी 84 घाटों का आपसी संपर्क टूट गया है। गंगा किनारे स्थित मंदिर पूरी तरह गंगा में जलमग्न हो गए है। गंगा स्नान करने और नौका विहार करने आने वाले लोगो को काफी दिक्कतों का समाना करना पड़ रहा है, तो वही प्रशासन ने छोटी नावों के संचालन को बंद करवा बड़ी नावों पर क्षमता से आधे यात्रियों को बैठाए जाने का आदेश दिया है। वाराणसी में बुधवार को गंगा का जलस्तर करीब 2 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। वही गंगा के बढ़ते जलस्तर की वजह से घटा किनारे रहने वाले लोगो की चिंता बढ़ गई है।

वाराणसी में बढ़ रहे गंगा के जलस्तर की वजह से दशाश्वमेध और शीतला घाट पर होने वाली विश्व प्रसिद्ध मां गंगा की आरती का स्थल आज शाम से बदल दिया जाएगा। मणिकर्णिका घाट स्थित रत्नेश्वर महादेव यानी बनारस का झुका हुआ मंदिर के 80 प्रतिशत तक डूब गया है। जबकि बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन भी अपनी तैयारी पूरी कर ली है। जिला प्रशासन और जल पुलिस के साथ एनडीआरएफ की टीम भी पूरी तरफ तैयार है। बाढ़ की स्थिति के आसार को देखते हुए घाट किनारे चौकी लगाकर पूजा करवाने वाले तीर्थपुरोहित और पांडा अपनी चौकियों को घाट के ऊपरी हिस्से में सुरक्षित स्थान पर रखने में जुट गए है।

तीर्थ पुरोहितों के अनुसार जिस प्रकार गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है, ऐसे में एक और दो दिन में गंगा घाट जलमग्न हो जाएंगे और घाट पर पूजा करने के बजाए यह पूजा घाट के ऊपर करवाया जाएगा। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार वाराणसी में बुधवार को 2 सेंटीमीटर के रफ्तार से गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है। जो चेतावनी बिंदु से करीब 8.74 मीटर नीचे है। वाराणसी में गंगा के जलस्तर का चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर और खतरे का निशान 71.26 मीटर है, वही अब तक वाराणसी में गंगा का जलस्तर सर्वाधिक 73.90 मीटर तक जा चुका है।
रिपोर्ट- नीरज जायसवाल









