
New- Delhi: नए साल के पहले दिन घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में हल्की गिरावट देखी गई। सोना 10 ग्राम में 57 रुपये की गिरावट के साथ 1,35,390 रुपये पर कारोबार कर रहा था, वहीं चांदी 1 किलो 111 रुपये गिरकर 2,35,590 रुपये पर पहुँच गई। यह गिरावट निवेशकों के बीच प्रॉफिट बुकिंग की वजह से देखी जा रही है। डॉलर की मजबूती ने भी इन कीमती धातुओं की कीमतों को प्रभावित किया है, क्योंकि डॉलर के मजबूत होने पर निवेशक सोने की बजाय डॉलर में निवेश करने को प्राथमिकता देते हैं।
हालांकि, 2025 का साल सोने और चांदी के लिए बहुत ही खास रहा। इस साल सोने और चांदी ने लगभग पिछले 46 सालों का रिकॉर्ड तोड़ा। 1979 के बाद पहली बार ऐसा हुआ जब दोनों धातुओं ने एक ही साल में इतनी बड़ी छलांग लगाई। साल के अंत में सोने के फरवरी में हल्की गिरावट देखी गई, लेकिन दिसंबर महीने में सोने ने 7% का रिटर्न दिया और सालभर में इसकी कीमत में 76.7% की बढ़ोतरी हुई।
वहीं, चांदी ने तो 2025 में करीब 170.70% का रिटर्न दिया, जो कि काफी चौंकाने वाला रिकॉर्ड रहा। औद्योगिक मांग में बढ़ोतरी और अमेरिका द्वारा इसे ‘क्रिटिकल मिनरल’ घोषित करने से इसकी कीमतों में बढ़ोतरी हुई। साल के अंत में चांदी ने 2,54,147 रुपये प्रति किलो तक का रिकॉर्ड स्तर छुआ।
इन कीमती धातुओं की ऐतिहासिक रैली के पीछे एक बड़ा कारण वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव रहा। जब भी वैश्विक तनाव बढ़ता है, तो निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने और चांदी की ओर रुख करते हैं। इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में की गई कटौती से डॉलर कमजोर हुआ, जिससे सोना और चांदी अन्य मुद्राओं के धारकों के लिए सस्ता और आकर्षक हो गया।
2025 में अन्य कीमती धातुएं जैसे प्लैटिनम और पैलेडियम ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। प्लैटिनम ने 1987 के बाद से अपना सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 124% की बढ़ोतरी की, जबकि पैलेडियम की कीमतों में 78% का उछाल आया। इन धातुओं की कीमतों में उछाल की वजह सप्लाई में कमी और निवेश के नए विकल्पों की तलाश को बताया जा रहा है। कुल मिलाकर, 2025 का साल कमोडिटी बाजार के लिए मुनाफे का साल साबित हुआ।









