Dhvani Hypersonic Glide Vehicle: चुटकियों में तबाह हो सकते हैं कई शहर, मिसाइलों की ताकत में सबसे तेज, ऐसा है ‘ध्वनि’ हाइपरसोनिक

वो ये की पहले के टाइम में जब युद्ध हुआ करते थे…तब सबसे ज्यादा सैना की पॉवर को ही अहमियत दी जाती थी…

Dhvani Hypersonic Glide Vehicle: इस दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध की स्थिति बनी हुई…कई देश आपस में टकरा रहे है….ताकतवर देश तो इस वक्त अपनी सैन्य ताकत को बढ़चढ़ कर दिखा रहे है…

अमेरिका से लेकर मिडिल ईस्ट और रुस यूक्रेन समेत कई देशों में इस वक्त सैन्य ताकतें ही दिखाई दे रही है….अमेरिका की वेनजुएला पर सैन्य कार्रवाई तो अभी की घटना है इससे पहले रूस और यूक्रेन के बीच जंग ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा था….बाद में इजरायल ने गाजा पर धावा बोल दिया….और इस सब लड़ाइयों में एक चीज सामान है….वो ये की पहले के टाइम में जब युद्ध हुआ करते थे…तब सबसे ज्यादा सैना की पॉवर को ही अहमियत दी जाती थी…जिसके पास जितनी सेना उतनी की अधिक ताकत पर अब ऐसा नहीं रह गए है….

अब हवाई हमलें गेम चेंजर साबित हो रहे है…क्यों कि सबसे पहले एयर स्ट्राइक ही शुरु होती है….किसी भी देश के अहम ठिकानों को हवाई हमलों के जरिए कमजोर करने की कोशिश की जाती है….ताकि डिफेंस सिस्टम पर तो सबसे पहले धावा बोला जाता है….और ड्रोन के जरिए अटैक किया जाता है…ड्रोन अटैक भी इस वक्त हाइप पर है…

21वीं सदी का सैन्य युद्ध 20वीं सदी से कई मायनों में अलग हो चुका है। पहले जहां सेना का महत्व था, अब वायुसेना ने उस भूमिका को अपने हाथों में लिया है। अब, जिस देश की वायुसेना जितनी मजबूत होती है, वह देश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उतना ही प्रभावशाली होता है। यही नहीं देशों के बीच सैन्य रणनीतियां और भी सटीक और प्रभावशाली हो गई हैं। इस बदलाव को ध्यान में रखते हुए हर देश अपनी रक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए नए-नए हथियारों और टेक्नोलॉजी पर काम कर रहा है।

भारत भी इस दिशा में पीछे नहीं है। देश का रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक पर काम कर रहा है, जो आने वाले समय में देश की रक्षा क्षमता को और भी बढ़ा देगा। DRDO द्वारा विकसित ‘ध्वनि हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल’ के परीक्षण की तैयारियां जोरों पर हैं। यह हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल इतनी तेज गति से उड़ान भरने में सक्षम होगा कि मौजूदा रडार सिस्टम उसे पहचान नहीं पाएंगे।

‘ध्वनि’ की गति मैक 6 (7400 किमी प्रति घंटा) या उससे भी अधिक होगी, और यह हाइपरसोनिक गति से आने वाले किसी भी खतरे को तुरंत नष्ट करने में सक्षम होगा। इसकी खासियत यह है कि यह तीखे मोड़ लेकर अपनी दिशा बदल सकता है, जिससे दुश्मन के रक्षा प्रणालियों के लिए इसे रोकना लगभग नामुमकिन हो जाता है। इसके अलावा, ‘ध्वनि’ में एक उन्नत थर्मल प्रोटेक्शन सिस्टम भी लगाया गया है, जो अत्यधिक तापमान में भी इसे सुरक्षित रखेगा।

भारत का यह हाइपरसोनिक मिसाइल प्रोग्राम न केवल एक तकनीकी उपलब्धि है, बल्कि यह देश की सामरिक शक्ति को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाला कदम भी है। साल 2026 की पहली तिमाही में ‘ध्वनि’ का परीक्षण किया जाएगा, और इसके सफलतापूर्वक लॉन्च होने के बाद भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा, जो हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक में महारत रखते हैं।

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