रूसी तेल के मुद्दे पर अमेरिका बना रहा दवाब,क्या ये नई रणनीति कंपनियों के आएगी काम?

भारत के पश्चिमी तट पर रिलायंस के प्लांट की ओर बढ़ रहे हैं। यह तेल भारतीय रिफाइनरियों में इस्तेमाल होने वाला ईंधन बनाने के काम आएगा, न कि निर्यात के लिए।

अमेरिका और भारत के व्यापारिक रिश्ते इन दिनों काफी ज्यादा उतार चढ़ाव के दौर से गुजर रहे है…बीते काफी महीनों से टैरिफ को लेकर भारत और अमेरिका के बीच में खींचातानी चल रही थी…तेल सहित कई मामलों को लेकर अमेरिका भारत पर दवाब बनाने की कोशिश करता आया है….

अमेरिका ने भारत पर दबाव डाला है कि वह रूस से तेल की खरीदारी बंद करे, लेकिन अब रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) ने अमेरिकी ट्रेजरी विभाग से मिले एक महीने के कन्‍सेशन के बाद फिर से रूसी तेल खरीदना शुरू कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, रिलायंस के तीन टैंकर, जिनमें लगभग 22 लाख बैरल रूसी यूराल्‍स कच्चा तेल है, भारत के पश्चिमी तट पर रिलायंस के प्लांट की ओर बढ़ रहे हैं। यह तेल भारतीय रिफाइनरियों में इस्तेमाल होने वाला ईंधन बनाने के काम आएगा, न कि निर्यात के लिए।

अक्टूबर में अमेरिका द्वारा रूस के तेल उत्पादक कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर प्रतिबंध लगाने के बाद, रिलायंस ने रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया था। इससे पहले, रोसनेफ्ट रिलायंस के लिए रूस से तेल की सबसे बड़ी सप्लायर थी, और दोनों के बीच प्रतिदिन 500,000 बैरल तेल सप्लाई का समझौता था। अब रिलायंस अन्य सप्लायर्स से तेल खरीद रही है।

रूसी तेल के मुद्दे पर अमेरिका ने भारतीय अधिकारियों की आलोचना की है, लेकिन भारत ने इसे लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है। अमेरिकी प्रशासन के दबाव के बावजूद, भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सस्ते तेल का फायदा उठा रहा है। हालांकि, इस स्थिति से भारत के ऊर्जा व्यापार में अनिश्चितताएं बनी हुई हैं, क्योंकि अमेरिका और अन्य देशों के साथ रिश्तों को भी संतुलित करना होगा।

भारत का रूसी तेल आयात वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच महत्वपूर्ण है, खासकर जब रूस से तेल खरीदने पर अंतरराष्ट्रीय आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है।

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