
Banda: जिले के कालिंजर थाना क्षेत्र में 2025 में 6 साल की बच्ची से रेप के दोषी को POCSO कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। यह फैसला महज 56 दिन में सुनाया गया, जो कि न्याय की तेज़ प्रक्रिया और बच्चों के खिलाफ हो रहे अपराधों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है।
बता दें, यह घटना 2025 की है जब अमित रैकवार नामक आरोपी ने 6 साल की बच्ची को टॉफी का लालच देकर उसे अपनी हवस का शिकार बनाया। बच्ची के परिवार वालों ने जब उसे लापता पाया तो उन्होंने तुरंत पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की और आरोपी को पकड़ने के लिए मुठभेड़ का सहारा लिया।
अंततः आरोपी को गिरफ्तार किया गया और मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने सुनवाई शुरू की। मामले में विभिन्न महत्वपूर्ण साक्ष्यों और बच्ची के बयान के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया।
बता दें, POCSO कोर्ट ने बच्ची से दुष्कर्म के आरोपी अमित रैकवार को दोषी ठहराते हुए उसे फांसी की सजा सुनाई। इस फैसले में अदालत ने कहा कि इस तरह के अपराधों को किसी भी हाल में माफ नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लिया और दोषी को सख्त सजा दी, जिससे यह साबित होता है कि बच्चों के खिलाफ इस तरह के अपराधों के मामले में कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।
कोर्ट ने महज 56 दिन में यह फैसला सुनाया, जो इस बात का प्रमाण है कि हमारे न्याय व्यवस्था में बच्चों से जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई हो रही है। यह त्वरित निर्णय पीड़ितों और उनके परिवारों को न्याय दिलाने के साथ ही समाज को भी एक मजबूत संदेश देता है कि अपराधियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
बता दें, इस फैसले ने यह साबित किया कि समाज में बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों के मामले में कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी। अदालत की त्वरित कार्रवाई और सख्त निर्णय से यह साफ हो गया कि ऐसे अपराधों के लिए किसी भी प्रकार की दया या सहानुभूति नहीं हो सकती। यह फैसला पीड़िता और उसके परिवार को न्याय दिलाने के साथ ही समाज में अपराधियों के लिए एक चेतावनी भी है।
वहीं,पुलिस और अदालत ने मामले को प्राथमिकता देते हुए त्वरित कार्रवाई की। यह दिखाता है कि अगर हम सामूहिक रूप से बच्चों के खिलाफ अपराधों के प्रति जागरूक हो जाएं और सही दिशा में कदम उठाएं, तो ऐसे अपराधियों को जल्दी सजा दिलाई जा सकती है। इस फैसले ने यह साबित कर दिया कि न्याय की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की देरी नहीं होती है।









