
मेरठ के कपसाड़ मामले ने यूपी की राजनीति गलियारों में काफी ज्यादा हलचल मचा रखी थी.इस मामले ने काफी ज्यादा तूल पकड़ लिया था और सियासत भी इस मामले में जमकर हो रही थी. पुलिस ने एक्टिव मोड में आते ही 60 घंटे बाद अपहर्ता को बरामद कर लिया. पर अब इस मामले में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए है…
इस मामले में डीआईजी कलानिधि नैथानी ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि इस कांड का उद्देश्य जातीय विवाद पैदा करना और माहौल को खराब करना था। कुछ असामाजिक तत्वों ने घटना को तूल देने की कोशिश की, लेकिन पुलिस और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई ने इसे नाकाम कर दिया। डीआईजी ने बताया कि घटना के 60 घंटे बाद अपहर्ता को सकुशल बरामद कर लिया गया और पीड़ित परिवार को सुरक्षा प्रदान की गई।
डीआईजी ने बताया कि पुलिस-प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया.घटना के बाद दो एसपी और 200 से अधिक पुलिसकर्मियों की 12 टीमें इस केस की जांच और अपहर्ता की बरामदगी के लिए लगाई गईं.सात जिलों और चार राज्यों में पुलिस की टीमें भेजी गईं और 500 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों की जांच की गई.
डीआईजी ने बताया कि घटना को संघर्ष का रूप देने की साजिश कुछ असामाजिक तत्वों ने की थी, जिसे पुलिस-प्रशासन ने नाकाम कर दिया. उन्होंने यह भी कहा कि गांव के लोगों ने संयम से काम लिया और शांति बनाए रखी.
घटना के बाद सपा, बसपा और सांसद चंद्रशेखर आजाद की पार्टी आसपा के नेताओं ने जमकर हंगामा किया था और कपसाड़ जाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया था. इस दौरान धक्का-मुक्की और नोकझोंक की स्थिति पैदा हो गई.लेकिन पुलिस ने इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया था.









