Nipah Virus: पश्चिम बंगाल में जानलेवा निपाह वायरस के दो संदिग्ध मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों के मुताबिक वर्ष 2001 के बाद यह पहला मौका है जब राज्य में इस वायरस की मौजूदगी की आशंका जताई गई है। दोनों संदिग्ध मामले स्वास्थ्यकर्मी बताए जा रहे हैं, जिनका इलाज कोलकाता के पास AIIMS कल्याणी में चल रहा है।
केंद्र सरकार अलर्ट, विशेषज्ञ टीम तैनात
संदिग्ध मामलों की सूचना मिलते ही केंद्र सरकार हरकत में आ गई है। नेशनल जॉइंट आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम को बंगाल भेजा गया है, जिसमें नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी और वन्यजीव विशेषज्ञ शामिल हैं। वायरस की गंभीरता को देखते हुए विशेष संक्रमण नियंत्रण प्रोटोकॉल लागू किए गए हैं।
कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और जांच तेज
राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती के अनुसार, दोनों संदिग्ध नर्सें हैं और हाल के दिनों में जिन-जिन लोगों के संपर्क में आईं, उनकी पहचान की जा रही है। उत्तर 24 परगना, नदिया और पूर्व बर्धमान जिलों में कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और सैंपल जांच जारी है। आपात स्थिति से निपटने के लिए हेल्पलाइन नंबर भी सक्रिय किए गए हैं।
कितना खतरनाक है निपाह वायरस?
निपाह वायरस एक जूनोटिक संक्रमण है, जो मुख्य रूप से फल खाने वाले चमगादड़ों (फ्लाइंग फॉक्स) से फैलता है। यह सूअरों और अन्य जानवरों के जरिए भी इंसानों तक पहुंच सकता है। चिंता की बात यह है कि यह वायरस मानव से मानव में भी फैल सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार इसकी मृत्यु दर 40 से 75 प्रतिशत तक हो सकती है, जो इसे बेहद घातक बनाती है।
टीका या दवा क्यों नहीं?
फिलहाल निपाह वायरस के लिए कोई प्रभावी टीका या विशेष दवा उपलब्ध नहीं है। इलाज केवल लक्षणों के आधार पर किया जाता है। यही कारण है कि समय पर पहचान और आइसोलेशन ही सबसे बड़ा बचाव माना जाता है।
कैसे करें बचाव?
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि संक्रमित या संदिग्ध क्षेत्रों में जाने से बचें, बीमार जानवरों के संपर्क में न आएं और अस्पतालों में सख्त संक्रमण नियंत्रण नियमों का पालन करें। बुखार, सिरदर्द, उलझन या तंत्रिका संबंधी लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।









