
Noida Metro Calendar Controversy: नोएडा मेट्रो के कैलेंडर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीर न लगाकर खुद की फोटो छापने का मामला अब बड़ा प्रशासनिक विवाद बन गया है। भारत समाचार की खबर के बाद सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए नोएडा प्राधिकरण में लंबे समय से OSD पद पर तैनात महेंद्र प्रसाद को हटाकर लखनऊ मुख्यालय से अटैच कर दिया है। इससे पहले उन्हें मेट्रो के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर पद से भी हटाया जा चुका था।

भारत समाचार की खबर के बाद हरकत में प्रशासन
नोएडा मेट्रो के आधिकारिक कैलेंडर में मुख्यमंत्री की तस्वीर की जगह एक अधिकारी की खुद की फोटो छपने का मामला सामने आते ही राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मच गई। भारत समाचार द्वारा इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद सरकार ने तत्काल संज्ञान लिया और कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हुई।
नोएडा : भारत समाचार की खबर का बड़ा असर
— भारत समाचार | Bharat Samachar (@bstvlive) January 13, 2026
➡ मेट्रो कैलेंडर में फोटो छापने का मामला
➡ OSD महेंद्र प्रसाद लखनऊ मुख्यालय से अटैच
➡ नोएडा प्राधिकरण से महेंद्र प्रसाद हटाए गए
➡ लंबे समय से OSD पद पर तैनात थे महेंद्र
➡ CEO लोकेश एम पर अबतक कार्रवाई नहीं
➡ महेंद्र ने खुद की भी… pic.twitter.com/UE7Ffv8XxJ
OSD महेंद्र प्रसाद पर गिरी गाज
इस विवाद के केंद्र में रहे OSD महेंद्र प्रसाद को नोएडा प्राधिकरण से हटा दिया गया है। अब उन्हें लखनऊ स्थित मुख्यालय से अटैच कर दिया गया है। महेंद्र प्रसाद लंबे समय से OSD पद पर तैनात थे और इससे पहले उन्हें मेट्रो के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर पद से भी हटाया जा चुका था। आरोप है कि मेट्रो कैलेंडर में उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की फोटो न लगवाकर अपनी तस्वीर प्रकाशित करवाई।

सीएम की फोटो हटाना बना बड़ा मुद्दा
प्रशासनिक नियमों के अनुसार, किसी भी सरकारी प्रकाशन में मुख्यमंत्री की तस्वीर प्राथमिकता से लगाई जाती है। ऐसे में अपनी फोटो लगाना न केवल नियमों की अनदेखी मानी जा रही है, बल्कि इसे सरकारी मर्यादा के खिलाफ भी बताया जा रहा है। इसी कारण यह मामला साधारण लापरवाही से आगे बढ़कर ‘दुस्साहस’ के सवाल तक पहुंच गया है।
CEO लोकेश एम पर कार्रवाई क्यों नहीं?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस पूरे प्रकरण में नोएडा मेट्रो के CEO लोकेश एम पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई। जबकि कैलेंडर छपने की प्रक्रिया अंतिम रूप से शीर्ष अधिकारियों की अनुमति के बाद ही पूरी होती है। कर्मचारी संगठनों और जानकारों का मानना है कि यदि जांच निष्पक्ष हुई, तो जिम्मेदारी केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं रह सकती।









