
अमेरिकी जज अरुण सुब्रमण्यम ने ट्रंप प्रशासन द्वारा डेमोक्रेट राज्यों के लिए तय किए गए $10 बिलियन फंड को रोकने के फैसले पर रोक लगा दी है। यह फैसला व्हाइट हाउस और एलन मस्क जैसे बड़े नामों को खिलाफत करने के लिए मजबूर कर दिया है। ट्रंप प्रशासन ने यह फंड अवैध प्रवासियों के लिए खर्च होने के आरोप में रोका था, जबकि जज ने गरीब परिवारों पर इसके विनाशकारी प्रभाव को देखते हुए यह निर्णय लिया।
एलन मस्क का हमला, ‘जज के भेष में एक्टिविस्ट’
इस फैसले पर एलन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (Twitter) पर तीखा हमला करते हुए कहा कि “अगर हाउस, सीनेट और प्रेसीडेंसी पर रिपब्लिकन का नियंत्रण होने के बावजूद वोटर्स नतीजों को प्रभावित नहीं कर पा रहे हैं तो हम लोकतांत्रिक शासन में नहीं रह रहे हैं।” मस्क ने जज सुब्रमण्यम को ‘जज के भेष में एक्टिविस्ट’ करार दिया और आरोप लगाया कि वह धोखाधड़ी को बढ़ावा दे रहे हैं।
न्यायपालिका बनाम कार्यपालिका: अमेरिका में बढ़ते विवाद
यह कानूनी लड़ाई अब अमेरिका में न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच गहरे विवाद को जन्म दे रही है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि संघीय अदालतों को कार्यपालिका को फंड जारी करने के लिए मजबूर करने का अधिकार नहीं है। वहीं, न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिटिया जेम्स ने इस फैसले का स्वागत किया, इसे राजनीतिक प्रतिशोध के तौर पर बताया। उन्होंने कहा कि फंड रोकने से घरेलू हिंसा आश्रय केंद्रों और कम आय वाले परिवारों को भारी नुकसान होगा।
कौन हैं जज अरुण सुब्रमण्यम?
अरुण सुब्रमण्यम, जो 2023 में राष्ट्रपति जो बाइडन द्वारा नियुक्त किए गए थे, न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले के पहले भारतीय-अमेरिकी संघीय जज हैं। उनका जन्म 1979 में ओहियो राज्य के क्लीवलैंड में हुआ था और वे एक मध्यमवर्गीय भारतीय प्रवासी परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनकी निष्पक्षता और कानून की गहरी समझ के लिए उन्हें जाना जाता है।
अब, इस मुद्दे पर अमेरिका में न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच संघर्ष और भी गहरा सकता है, और देखना यह होगा कि अगले 14 दिनों में अदालत इस पर और कोई फैसला देती है या नहीं।









