
SIP Investment: सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) म्यूचुअल फंड में निवेश का ऐसा तरीका है, जिसमें निवेशक एकमुश्त रकम लगाने के बजाय हर महीने या तय समय पर छोटी-छोटी किस्तों में पैसा निवेश करता है। यह तरीका खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद है, जो लंबे समय में संपत्ति बनाना चाहते हैं और बाजार के उतार-चढ़ाव से घबराना नहीं चाहते।
2025 में SIP ने बनाया नया रिकॉर्ड
एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में SIP के जरिए कुल ₹3.34 लाख करोड़ का निवेश दर्ज किया गया। यह अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। इससे पहले 2024 में यह आंकड़ा ₹2.68 लाख करोड़ और 2023 में ₹1.84 लाख करोड़ रहा था। साफ है कि हर साल निवेशकों का भरोसा SIP पर और मजबूत हुआ है।
दिसंबर बना सबसे खास महीना
सितंबर, अक्टूबर और नवंबर 2025 में SIP योगदान लगातार ₹29,000 करोड़ से ऊपर बना रहा, जबकि दिसंबर में यह बढ़कर ₹31,000 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों ने निवेश जारी रखा, जो उनकी लंबी अवधि की सोच को दर्शाता है
बाजार की गिरावट को मौका बना रहे निवेशक
जानकारों का मानना है कि निवेशकों ने बाजार में आई गिरावट को डर की बजाय मौके के रूप में देखा। SIP के जरिए नियमित निवेश करने से औसत लागत का फायदा मिलता है, जिससे लंबे समय में बेहतर रिटर्न की संभावना बढ़ जाती है।
इक्विटी फंड्स में भी मजबूत भरोसा
इक्विटी आधारित म्यूचुअल फंड योजनाओं में शुद्ध निवेश ₹3.8 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। AMFI के सीईओ वेंकट चलसानी के अनुसार, भारत की लंबी अवधि की विकास कहानी में निवेशकों का भरोसा बना हुआ है और म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का आउटलुक सकारात्मक है।
SIP क्यों बंद कर देते हैं कुछ निवेशक
हालांकि SIP लोकप्रिय है, लेकिन कई बार लोग इसे बीच में बंद भी कर देते हैं। इसके पीछे बाजार में तेज गिरावट, नुकसान का डर, बढ़ती महंगाई, नौकरी या आय में अनिश्चितता और अचानक पैसों की जरूरत जैसे कारण होते हैं। इसके अलावा, कम समय में ज्यादा रिटर्न की गलत उम्मीद और सही वित्तीय सलाह की कमी भी SIP बंद होने की बड़ी वजह बनती है।
छोटी शुरुआत, बड़ा फायदा
SIP की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे मात्र ₹250 प्रति माह से भी शुरू किया जा सकता है। यही वजह है कि नए निवेशक भी बिना ज्यादा जोखिम उठाए निवेश की दुनिया में कदम रख पा रहे हैं।









