
Delhi: फूड और ग्रॉसरी डिलीवरी ऐप कंपनियों द्वारा 10 मिनट में डिलीवरी देने का नियम अब हटा दिया गया है, जिससे गिग वर्करों को बड़ी राहत मिली है। लंबे समय से इस नियम से परेशान गिग वर्करों को अब जान जोखिम में डालकर तेज़ गति से दोपहिया वाहन चलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे वेतन और इंसेंटिव कटने का डर भी खत्म हो गया है।
बता दें, इस बदलाव के बाद गिग वर्करों ने खुशी जताई है। उनका कहना है कि 10 मिनट में डिलीवरी की समय सीमा से दबाव बनता था और कई बार वे दुर्घटनाओं का शिकार हो जाते थे। अब वे आराम से अपने काम को पूरा कर सकेंगे और सुरक्षित रहेंगे।
वहीं, 31 दिसंबर 2025 को गिग वर्करों ने अपनी विभिन्न मांगों के साथ हड़ताल की थी, जिसमें 10 मिनट में डिलीवरी की समय सीमा को समाप्त करने की प्रमुख मांग थी। इसके अलावा, वेतन और इंसेंटिव बढ़ाने की भी मांग की गई थी। गिग वर्करों का कहना है कि इस फैसले से उनकी जिंदगी की सुरक्षा बढ़ेगी और उनके काम की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।
कैट (कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स) ने इस फैसले की सराहना की है। संगठन के प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि यह कदम सरकार की गिग वर्कर्स की सुरक्षा और उनके सम्मान के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि कैट ने लंबे समय से इस अनियंत्रित और खतरनाक क्विक कॉमर्स मॉडल के बारे में सरकार को आगाह किया था।
वहीं, फूड डिलीवरी ब्वॉय दीपक कड़ते ने इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि 10 मिनट की समय सीमा के कारण कई बार उन्हें तेज़ गति से बाइक चलानी पड़ती थी, जिससे हादसे का खतरा रहता था। अब इस नियम के हटने से उन्हें राहत मिलेगी और वे सुरक्षित तरीके से डिलीवरी कर सकेंगे।
बता दे, ग्रॉसरी डिलीवरी ब्वॉय मोहित ने कहा कि हर ऑर्डर एक रेस जैसा महसूस होता था और समय पर डिलीवरी करने के दबाव के कारण दुर्घटनाओं का खतरा हमेशा बना रहता था। अब, 10 मिनट की समय सीमा हटने से काम थोड़ा आसान हो गया है।
शुभम पॉल, एक फूड डिलीवरी ब्वॉय, ने कहा कि इस नियम के कारण हमेशा दबाव महसूस होता था। ट्रैफिक और सिग्नल की स्थिति में रुकने का मतलब रेटिंग में गिरावट था। अब इस फैसले से वह आराम से डिलीवरी कर सकेंगे और रेटिंग पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा।
ग्रॉसरी डिलीवरी ब्वॉय शमशाद ने बताया कि यह फैसला बहुत पहले लिया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि उन्हें और उनके साथियों को समय की कमी के कारण कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। देरी होने पर उनके वेतन और इंसेंटिव पर असर पड़ता था, लेकिन अब वह आराम से काम कर सकेंगे।
वहीं, इस फैसले से गिग वर्कर्स के जीवन में एक बड़ा बदलाव आएगा और उनके काम करने की परिस्थितियां बेहतर होंगी। अब वे बिना किसी दबाव के अपने काम को पूरा कर सकेंगे और सड़क पर अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकेंगे।









