मकर संक्रांति पर खिचड़ी क्यों खाई जाती है?, खिचड़ी खाने की परंपरा के पीछे का कारण यहां जानिए

जो शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है. इसे खाने से शीतकालीन मौसम में शरीर को ताजगी मिलती है, और यह प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाता है.

मकर संक्रांति हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो हर साल 14 जनवरी को मनाया जाता है. लेकिन इस बार तिथि के फेर के चलते 15 जनवरी को खिचड़ी यानी की मकर संक्रांति का त्यौहार मनाया जा रहा है. इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है और दिन लंबा होना शुरू हो जाता है.मकर संक्रांति का पर्व विशेष रूप से उत्तर भारत में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन विशेष रूप से खिचड़ी बनाने और खाने की परंपरा है. यह परंपरा भारतीय संस्कृति में बहुत प्राचीन समय से चली आ रही है.

खिचड़ी का सेवन मकर संक्रांति पर क्यों किया जाता है, इसके पीछे धार्मिक और सांस्कृतिक कारण हैं. धार्मिक दृष्टि से माना जाता है कि इस दिन सूर्य देवता की पूजा की जाती है और खिचड़ी को ‘तृप्ति’ और ‘शुद्धता’ का प्रतीक माना जाता है. खिचड़ी में ताजे अनाज, ताजे घी और ताजे सब्जियों का इस्तेमाल होता है, जो शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है. इसे खाने से शीतकालीन मौसम में शरीर को ताजगी मिलती है, और यह प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाता है.

इसके अलावा, खिचड़ी को संतुलित आहार माना जाता है क्योंकि यह प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और विटामिन्स से भरपूर होता है.खिचड़ी में शामिल दाल, चावल और सब्जियां एक साथ मिलकर शरीर को आवश्यक पोषण प्रदान करती हैं.

पारंपरिक रूप से, मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाने का उद्देश्य ‘नवजीवन’ की शुरुआत और उबटन के रूप में होता है। यह एक तरह से शरीर और आत्मा को शुद्ध करने का प्रयास भी माना जाता है.

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