अमेरिका की ग्रीनलैंड धमकी के बाद यूरोप ने दिखाई सैन्य सक्रियता, फ्रांस के सैनिक तैनात …

मैक्रों ने फ्रांसीसी सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा, "हमें ग्रीनलैंड की सुरक्षा को मजबूत करना होगा। इस उद्देश्य के लिए पहले ही फ्रांसीसी सैनिकों की एक टीम ग्रीनलैंड में पहुंच चुकी है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को लेकर सैन्य धमकी देने के बाद यूरोपीय देश अब अपनी सैन्य सक्रियता बढ़ाने लगे हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका की धमकियों को फ्रांस नजरअंदाज नहीं कर सकता और जल्द ही फ्रांस अपने तीनों सैन्य विभागों – थल, वायु और नौसेना – को ग्रीनलैंड भेजेगा।

बता दें, मैक्रों ने फ्रांसीसी सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा, “हमें ग्रीनलैंड की सुरक्षा को मजबूत करना होगा। इस उद्देश्य के लिए पहले ही फ्रांसीसी सैनिकों की एक टीम ग्रीनलैंड में पहुंच चुकी है। आने वाले दिनों में और सैनिक थल, वायु और समुद्री संसाधनों को सुदृढ़ करने के लिए भेजे जाएंगे।”

बता दें, फ्रांस की यह पहल ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और यूरोप के बीच बढ़ते तनाव के बीच आई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने सत्ता में आते ही ग्रीनलैंड को अमेरिकी हितों के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए इसे हथियाने की अपनी योजना सार्वजनिक की थी। शुरुआत में इसे गंभीरता से नहीं लिया गया था, लेकिन अब जब ट्रंप ने सैन्य विकल्प को भी खोलने का संकेत दिया है, स्थिति और गंभीर हो गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका का बढ़ता सैन्य बजट सिर्फ सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि दूसरे देशों पर दबाव और सैन्य प्रभुत्व स्थापित करने के लिए है। राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे अगले साल तक लगभग 1.5 ट्रिलियन डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।

वहीं, ग्रीनलैंड, जो डेनमार्क के स्वायत्त शासन के तहत आता है, और इसमें करीब 56 हजार लोग रहते हैं। पूरी तरह बर्फ से ढंके इस क्षेत्र पर ट्रंप की नजर है। अमेरिकी राष्ट्रपति का मानना है कि आर्कटिक में अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए ग्रीनलैंड पर कब्जा जरूरी है। हालांकि, डेनमार्क ने पहले ही अमेरिकी बेस स्थापित करने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन ट्रंप इसे पर्याप्त नहीं मानते।

वहीं, कई विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रीनलैंड में बर्फ के नीचे खनिज संसाधन छिपे हैं। अगर अमेरिका इसे अपने नियंत्रण में लेता है, तो यह अलास्का की ओर एक भविष्य की खदान के रूप में काम कर सकता है और आर्कटिक क्षेत्र में अमेरिकी प्रभुत्व को बढ़ावा देगा।

डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने अमेरिकी कब्जे के विचार को खारिज कर दिया है। ग्रीनलैंड के उपप्रधानमंत्री म्यूट एगेडे ने कहा कि नाटो कुछ ही दिनों में ग्रीनलैंड में सैनिक तैनात करेगा और सैन्य विमानों और जहाजों की संख्या में वृद्धि होगी।

हालांकि, फ्रांस, जर्मनी और नॉर्डिक देशों ने भी ग्रीनलैंड में यूरोपीय सैन्य अभियान में भाग लेने की पुष्टि की है। इसका उद्देश्य ग्रीनलैंड की सुरक्षा सुनिश्चित करना और वाशिंगटन, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच मतभेदों को कम करना है। वहीं, पोलैंड ने सैनिक नहीं भेजने का निर्णय लिया। पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने चेतावनी दी कि नाटो देशों के बीच किसी भी तरह का हमला “दुनिया के अंत” जैसा होगा और यूरोपीय एकता व नाटो एकजुटता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

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