भारत में बेरोजगारी का बढ़ता संकट, सरकारी और निजी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर घट रहे

जो हर किसी के पास नहीं है. इसके अलावा, सरकारी नौकरियों में कमी और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी भी इस समस्या को बढ़ा रही है.

भारत की आबादी दिन ब दिन बढ़ रही है…और जैसे-जैसे आबादी बढ़ रही है…वैसे-वैसे देश में बेरोजगारी की समस्या भी बढ़ रही है…आज हमारे देश में बेरोजगारी एक ऐसी समस्या है…जिससे पार पाना काफी ज्यादा मुश्किल हो गया है.क्योंकि युवाओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है…और नौकरी के नाम पर लोगों को कुछ भी नहीं मिल रहा है.

भारत में बेरोजगारी की दर पिछले सालों में और बड़ी समस्या बन चुका है. जो युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों की कमी का कारण बन रही है.केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी की गई हालिया रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2025 तक देश में 15 साल और उससे ऊपर की उम्र वाले लोगों में बेरोजगारी की दर 4.8 प्रतिशत तक पहुंच गई है.जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा और भी ज्यादा है, जहां बेरोजगारी दर 6.7 प्रतिशत तक पहुंच गई है.

यह स्थिति स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि सरकारी और निजी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर घट रहे हैं। हालांकि, सरकार ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘स्किल इंडिया’ जैसी योजनाओं के जरिए कौशल विकास को बढ़ावा देने की कोशिश की है, लेकिन इसके बावजूद लाखों युवा अपनी आवश्यक कौशल क्षमता को बढ़ाने के बावजूद रोजगार के अवसरों से वंचित हैं।

इतना ही नहीं, कुछ क्षेत्रों में AI के जरिए कुछ क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़े हैं, लेकिन इनमें भी विशेष कौशल की आवश्यकता है, जो हर किसी के पास नहीं है. इसके अलावा, सरकारी नौकरियों में कमी और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी भी इस समस्या को बढ़ा रही है.

एक रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर स्थिर रही, जो 3.9 प्रतिशत थी। इसके बावजूद, भारत के आर्थिक विकास के लिए रोजगार सृजन अत्यंत महत्वपूर्ण है.कहा जा रहा है कि यदि सरकार को 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य पूरा करना है, तो उसे शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार सृजन पर अधिक ध्यान देना होगा.

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