गरुड़ पुराण में प्रेत योनि का वर्णन, जानिए मुक्ति दिलाने का उपाय…

गरुड़ पुराण में प्रेत योनि में जाने के कई कारण बताए गए हैं। सबसे सामान्य कारण अकाल मृत्यु होती है, जैसे दुर्घटना, आत्महत्या, हत्या या किसी अधूरी इच्छा के साथ मृत्यु। जब मृत्यु के समय व्यक्ति के मन में क्रोध, लोभ, मोह होता है या उसकी कोई इच्छा अधूरी रह जाती है, तो आत्मा भटकने लगती है।

गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा का विस्तार से वर्णन किया गया है। जब आत्मा मृत्यु के बाद सामान्य रूप से अपने सफर पर नहीं बढ़ पाती, तो वह प्रेत योनि में भटकने लगती है। प्रेत योनि में आत्मा को भूख, प्यास, दुख और अशांति का कष्ट सहना पड़ता है। ऐसा तब होता है जब आत्मा कुछ खास कारणों से प्रेत बन जाती है और वह अपने परिवार के आसपास भटकती रहती है। इस कारण घर में अशांति, स्वास्थ्य समस्याएं, आर्थिक नुकसान और नकारात्मक घटनाएं बढ़ने लगती हैं।

बता दें, गरुड़ पुराण में प्रेत योनि में जाने के कई कारण बताए गए हैं। सबसे सामान्य कारण अकाल मृत्यु होती है, जैसे दुर्घटना, आत्महत्या, हत्या या किसी अधूरी इच्छा के साथ मृत्यु। जब मृत्यु के समय व्यक्ति के मन में क्रोध, लोभ, मोह होता है या उसकी कोई इच्छा अधूरी रह जाती है, तो आत्मा भटकने लगती है। इसके अलावा, पितृ ऋण भी एक बड़ा कारण है। यदि व्यक्ति ने अपने पितरों का तर्पण और श्राद्ध नहीं किया, तो आत्मा प्रेत बनकर भटकती है।

बता दें, जब प्रेत आत्मा घर के आसपास भटकती है, तो उसके प्रभाव धीरे-धीरे दिखाई देने लगते हैं। घर में झगड़े और कलह बढ़ जाती है, परिवार में तनाव और चिड़चिड़ापन बढ़ता है। बच्चों या किसी सदस्य को अकारण बीमारी हो सकती है या डरावने सपने आने लगते हैं। रात में अजीब आवाजें सुनाई देना, घर में नकारात्मक वातावरण महसूस होना या छोटी-मोटी दुर्घटनाएं होना भी प्रेत बाधा के लक्षण होते हैं। आर्थिक रूप से भी रुकावटें आ सकती हैं, जैसे धन का प्रवाह रुकना या अचानक नुकसान होना।

प्रेत आत्मा से मुक्ति के लिए उपाय में अमावस्या को तिल-जल से तर्पण करना चाहिए। प्रेत योनि में जाने वाली आत्मा के लिए यह विशेष रूप से लाभकारी मानी जाता हैं और काले तिल, जूते-चप्पल, कंबल या अनाज का दान करें। हनुमान जी की पूजा और रोज हनुमान चालीसा का पाठ करने से प्रेत आत्मा को शांति मिलती है। साथ ही शनिवार या अमावस्या को पीपल पर जल चढ़ाना और उसकी परिक्रमा करना।

प्रेत बाधा से बचाव के लिए रोज शाम को घी का दीपक जलाएं और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ या ‘ॐ हं हनुमते नमः’ का जाप करें। घर में गंगाजल का नियमित छिड़काव करें।घर के मुख्य द्वार पर स्वस्तिक या ॐ का चिह्न लगाएं और रसोई में थोड़ा अन्न बचाकर रखें।

गरुड़ पुराण के अनुसार, प्रेत योनि एक दुखदायी स्थिति है, लेकिन सही उपायों से प्रेत आत्मा को मुक्ति दिलाई जा सकती है। पितरों का तर्पण, दान, हनुमान पूजा और सात्विक जीवन अपनाने से प्रेत बाधा से बचाव संभव है। अगर घर में प्रेत बाधा के लक्षण दिखाई दें, तो तत्काल उपाय शुरू करें। इससे आत्मा को शांति मिलेगी और परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी।

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