
भारत ने पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की द्वारा बनाए गए इस्लामिक नाटो गठबंधन पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे सुरक्षा और रणनीतिक दृष्टिकोण से चुनौती दी है। इस गठबंधन के अस्तित्व से भारत ने आशंका जताई है और इसे वैश्विक सुरक्षा पर असर डालने वाला कदम करार दिया है। भारत ने यह भी कहा कि इस्लामिक देशों का यह समूह यदि भारत के खिलाफ किसी प्रकार की साजिश करता है, तो वह इज़राइल के साथ मिलकर रणनीतिक जवाबी कार्रवाई करेगा।
बता दें, पाकिस्तान, सऊदी अरब, तुर्की, और अन्य मुस्लिम देशों का यह गठबंधन एक प्रकार से इस्लामिक देशों का सुरक्षा गठबंधन बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इसके उद्देश्य में रक्षा, सुरक्षा और सैन्य सहयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ पश्चिमी देशों के खिलाफ एक साझेदारी तैयार करना है। इस गठबंधन का उद्देश्य मुस्लिम देशों को एकजुट करना और सामूहिक रूप से सुरक्षा खतरों का मुकाबला करना है।
वहीं, भारत ने इस गठबंधन की बढ़ती प्रभावशीलता पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और इसे एक खतरनाक कदम बताया है, जो क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकता है। भारत के अधिकारी इस्लामिक देशों के इस कदम को अपनी सुरक्षा के लिए खतरे के रूप में देख रहे हैं, विशेष रूप से पाकिस्तान की भूमिका को लेकर। भारत ने यह भी कहा कि यदि यह गठबंधन किसी भी प्रकार की साजिश करता है तो वह इज़राइल के साथ मिलकर इसके खिलाफ ठोस कदम उठाएगा।
बता दें, भारत ने इज़राइल के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को मजबूती देने का इरादा जताया है। दोनों देशों के बीच कई दशकों से मजबूत सैन्य और सुरक्षा संबंध रहे हैं, और अब इस्लामिक नाटो के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए इन संबंधों को और भी मजबूत किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और इज़राइल का यह गठबंधन इस्लामिक देशों की रणनीति के खिलाफ एक मजबूत जवाब हो सकता है।
भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपनी सुरक्षा को लेकर किसी भी प्रकार के खतरे को गंभीरता से लेगा और इस्लामिक नाटो जैसे गठबंधनों से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों का कड़ा जवाब देने के लिए तैयार है। इसका प्रभाव न केवल क्षेत्रीय शांति पर पड़ेगा, बल्कि वैश्विक राजनीति में भी इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।









