
भारत और यूरोपीय संघ के बीच 77वें, गणतंत्र दिवस समारोह के मौके पर किए गए एक विशेष कदम ने राजनीतिक और अंतर्राष्ट्रीय हलकों में हलचल मचा दी है। इस कदम ने खासकर पाकिस्तान स्थित आईएसआई (ISI) और खालिस्तानी संगठनों को चौंका दिया है। भारत और यूरोपीय संघ की रणनीति ने न केवल उनकी योजनाओं को प्रभावित किया है, बल्कि कई बड़े सवाल भी खड़े कर दिए हैं।
बता दें, गणतंत्र दिवस के दिन भारत ने यूरोपीय संघ के साथ एक नए समझौते पर सहमति जताई, जो भारतीय सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस समझौते के तहत, दोनों पक्ष एक दूसरे के सहयोग से सुरक्षा, व्यापार, और आतंकवाद पर कड़ी कार्रवाई की दिशा में काम करेंगे।
वहीं, इस कदम ने पाकिस्तान स्थित आईएसआई और खालिस्तानी समर्थक समूहों के बीच चिंता की लहर पैदा कर दी है। इन संगठनों का मानना है कि भारत और यूरोपीय संघ की साझेदारी उनके उद्देश्यों को प्रभावित कर सकती है, खासकर जब बात पाकिस्तान से जुड़ी आतंकवाद की हो। आईएसआई और खालिस्तानी समूहों को डर है कि इस नई साझेदारी से उनकी गतिविधियों पर कड़ा नजर रखने के प्रयासों में तेजी आएगी।
बता दें, राजनीतिक रूप से यह कदम भारत की कूटनीतिक जीत मानी जा रही है, जो पश्चिमी देशों के साथ भारत के रिश्तों को मजबूत करने का प्रयास है। यूरोपीय संघ से इस समझौते का ऐलान न केवल भारतीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारत के वैश्विक स्तर पर बढ़ते प्रभाव को भी दर्शाता है।
भारत और यूरोपीय संघ का यह कदम एक नई कूटनीतिक दिशा को दर्शाता है, जो न केवल पाकिस्तान और खालिस्तानी संगठनों के लिए चुनौती बन सकता है, बल्कि भारत की अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा और व्यापार को भी मजबूत करेगा। आने वाले समय में इस समझौते से होने वाले परिणामों पर नजरें टिकी रहेंगी।









