सुप्रीम कोर्ट ने कांचीपुरम मंदिर विवाद में जस्टिस संजय किशन कौल को मध्यस्थ नियुक्त किया

मद्रास हाई कोर्ट ने दिसंबर 2025 में थेंगलाई संप्रदाय के एकाधिकार को बरकरार रखा था, जिससे वडगलई समुदाय के सदस्य नाराज थे.

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मद्रास हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजय किशन कौल को कांचीपुरम के देवराज स्वामी मंदिर में पूजा और मंत्रोच्चार को लेकर चल रहे संप्रदायिक विवाद को सुलझाने के लिए मध्यस्थ नियुक्त किया है.

यह विवाद वडगलई (उत्तरी संप्रदाय) और थेंगलाई (दक्षिणी संप्रदाय) वैष्णव समुदायों के बीच है, जो मंदिर में पूजा और मंत्र पाठ के अधिकारों को लेकर कई वर्षों से विवादित हैं.

जानकारी के लिए बता दें कि मंदिर का यह विवाद अक्सर कानुम पोंगल जैसे त्योहारों के दौरान भड़क उठता है, जहां दोनों संप्रदायों के बीच मंत्रोच्चार की प्राथमिकता को लेकर झड़पें होती हैं. थेंगलाई संप्रदाय खुद को पूजा अधिकारों का हकदार मानता है, जबकि वडगलई संप्रदाय भी समान अधिकार का दावा करता है. मद्रास हाई कोर्ट ने दिसंबर 2025 में थेंगलाई संप्रदाय के एकाधिकार को बरकरार रखा था, जिससे वडगलई समुदाय के सदस्य नाराज थे.

सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप इस विवाद को शांत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, और जस्टिस कौल को इस विवाद को आपसी सहमति से सुलझाने का जिम्मा सौंपा गया है.

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