
कावेरी हॉस्पिटल, अलवरपेट ने 78 साल के एक मरीज पर बायोप्रोस्थेटिक वाल्व फ्रैक्चर के साथ दुनिया का पहला TAVR-इन-TAVR-इन-SAVR प्रोसीजर सफलतापूर्वक किया है। यह एक अत्यधिक मुश्किल और दुर्लभ प्रक्रिया है, जो दुनिया में पहला केस है। यह एडवांस्ड ट्रांसकैथेटर इंटरवेंशन एक ऐसे मरीज के लिए किया गया था, जिसका एओर्टिक वाल्व रोग का लंबा और जटिल इतिहास था और जो बार-बार खराब होते जा रहे हार्ट वाल्व से परेशान था।
बता दें, मरीज को पहले गंभीर एओर्टिक स्टेनोसिस का सामना करना पड़ा था, जिसमें दिल का मुख्य वाल्व सिकुड़ जाता है और खून का प्रवाह रुकने लगता है। 2005 में, उनका ओपन-हार्ट सर्जरी (सर्जिकल एओर्टिक वाल्व रिप्लेसमेंट-SAVR) किया गया था, जिसमें खराब वाल्व को बायोप्रोस्थेटिक (टिशू) वाल्व से बदला गया। इसके बाद समय के साथ वाल्व खराब होने लगा और 2019 में, उन्हें ट्रांसकैथेटर (TAVR) वाल्व-इन-वाल्व रिप्लेसमेंट की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। यह एक मिनिमली इनवेसिव प्रोसीजर है जिसमें पुराने सर्जिकल वाल्व के अंदर नया वाल्व लगाया जाता है, बिना छाती खोले।
वहीं, इसके बाद के कुछ वर्षों में, मरीज को फिर से सांस फूलने और थकान जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। जांच में पता चला कि वाल्व में प्रेशर ग्रेडिएंट बढ़ रहे थे, जिससे खून का बहाव रुकने लगा था। आगे की जांच में यह भी पाया गया कि लीफलेट थ्रोम्बोसिस (खून का थक्का बनना) हो गया था, जिससे लीफलेट्स मोटे हो गए थे और पूरी तरह से नहीं खुल पा रहे थे। हालांकि, एंटीकोएगुलेशन दवा से थोड़े समय के लिए सुधार हुआ, लेकिन इलाज बंद करने पर समस्या फिर से उत्पन्न हो जाती थी।
मरीज की उम्र, पहले की हुई प्रक्रियाएं, और सर्जरी का जोखिम को देखते हुए, ओपन-हार्ट सर्जरी एक खतरनाक विकल्प था। कावेरी हॉस्पिटल, अलवरपेट में मरीज को रेफर करने के बाद, डॉ. राजाराम अनंतरामन और डॉ. सी. सुंदर की लीडरशिप में एक मल्टीडिसिप्लिनरी हार्ट टीम ने एडवांस्ड 3D इकोकार्डियोग्राफी और CT इमेजिंग का उपयोग करके विस्तृत असेसमेंट किया। इन जांचों से यह पाया गया कि मेडिकल थेरेपी के बावजूद लीफलेट मोटे हो रहे थे और वाल्व ठीक से नहीं खुल पा रहा था। इसके बाद, टीम ने TAVR-इन-TAVR-इन-SAVR प्रोसीजर करने का निर्णय लिया, जिसमें पहले से लगाए गए ट्रांसकैथेटर वाल्व के अंदर एक नया ट्रांसकैथेटर वाल्व लगाया गया।
वाल्व के फैलाव और ब्लड फ्लो को सुधारने के लिए, बायोप्रोस्थेटिक वाल्व फ्रैक्चर तकनीक का उपयोग किया गया। इसमें पहले से मौजूद सर्जिकल वाल्व के फ्रेम को फ्रैक्चर करके नए वाल्व के लिए ज्यादा जगह बनाई गई, ताकि वह बेहतर तरीके से फैल सके और अधिक प्रभावी हो सके। इस प्रक्रिया में जोखिम को कम करने के लिए डुअल सेरेब्रल प्रोटेक्शन का इस्तेमाल किया गया, जिसमें दो स्पाइडर FX डिवाइस दोनों कैरोटिड आर्टरी में लगाए गए, ताकि स्ट्रोक के खतरे को कम किया जा सके।
यह प्रोसीजर विशेष रूप से मुश्किल था क्योंकि मरीज का बाइकसपिड एओर्टिक वाल्व (जो सामान्यत: तीन की बजाय दो लीफलेट्स से बना होता है) और उसकी असामान्य आर्टरी संरचना के कारण चुनौतीपूर्ण था। हालांकि, इस जटिल प्रक्रिया को ध्यानपूर्वक और सटीकता से किया गया। डॉ. राजाराम अनंतरामन ने कहा, “इस जटिल प्रोसीजर के लिए हमारी हार्ट वाल्व टीम को अत्यधिक ध्यान और सटीकता की आवश्यकता थी। इसके बावजूद, प्रोसीजर सफलतापूर्वक पूरा हुआ, और मरीज जल्दी ठीक हो गए। अगले दिन ही उन्हें वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया और 48 घंटों के अंदर उन्हें छुट्टी दे दी गई।”
इस सफलता पर कावेरी ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के को-फ़ाउंडर और एग्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर, डॉ. अरविंदन सेल्वराज ने कहा, “यह केस कावेरी हॉस्पिटल, अलवरपेट की गहरी क्लिनिकल एक्सपर्टीज़ को प्रदर्शित करता है। ऐसे उच्च जोखिम वाले और जटिल कार्डियक केस को लोकल स्तर पर संभालने से मरीजों को विदेश जाने की आवश्यकता कम हो जाती है।”
कावेरी हॉस्पिटल, चेन्नई एडवांस्ड ट्रांसकैथेटर प्रोसीजर्स, स्टेट-ऑफ-द-आर्ट इमेजिंग और कॉम्प्रिहेंसिव मल्टीडिसिप्लिनरी कार्डियक केयर के जरिए स्ट्रक्चरल हार्ट डिजीज़ मैनेजमेंट में अपनी अग्रणी भूमिका को और भी मजबूत कर रहा है, जिससे मरीजों को घर के पास ही विश्वस्तरीय इलाज मिल रहा है।









