ब्रिटेन में भारतीय समुदाय बना सबसे सफल प्रवासी समूह, अर्थव्यवस्था को दी नई मजबूती

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि ब्रिटेन के टेक्नोलॉजी और आईटी सेक्टर में भारतीय मूल के पेशेवरों की बड़ी हिस्सेदारी है। यह वही सेक्टर है, जिसमें ब्रिटेन अमेरिका और चीन के बाद दुनिया में तीसरे स्थान पर माना जाता है।

ब्रिटेन में भारतीय समुदाय सबसे अधिक आर्थिक रूप से सफल प्रवासी समूह के रूप में उभरा है। एस्टन यूनिवर्सिटी और ब्रिटेन की मल्टीकल्चरल एडवर्टाइजिंग एजेंसी Here & Now 365 की एक नई रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, कई पीढ़ियों से ब्रिटेन में रह रहे भारतीय मूल के लोगों ने देश की अर्थव्यवस्था, पब्लिक सर्विसेज और वैश्विक प्रभाव को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई है।

आर्थिक और श्रम बाजार से जुड़े आंकड़ों के आधार पर तैयार इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय समुदाय रोजगार दर, शिक्षा के स्तर और उद्यमशीलता की संस्कृति के मामले में अन्य प्रवासी समूहों से आगे है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि ब्रिटेन के टेक्नोलॉजी और आईटी सेक्टर में भारतीय मूल के पेशेवरों की बड़ी हिस्सेदारी है। यह वही सेक्टर है, जिसमें ब्रिटेन अमेरिका और चीन के बाद दुनिया में तीसरे स्थान पर माना जाता है।

रिपोर्ट के अनुसार, आज ब्रिटेन के टेक वर्कफोर्स में करीब 15 प्रतिशत हिस्सेदारी भारतीय मूल के पेशेवरों की है। ये लोग डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, इनोवेशन और प्रोडक्टिविटी को बढ़ाने में अहम योगदान दे रहे हैं। रिपोर्ट में भारतीय प्रवासन को चार प्रमुख चरणों में बांटकर समझाया गया है।

पहला चरण द्वितीय विश्व युद्ध के बाद शुरू हुआ, जब भारत से आए श्रमिकों ने मैन्युफैक्चरिंग, ट्रांसपोर्ट और पब्लिक सर्विसेज में काम कर ब्रिटेन को संभालने में मदद की। दूसरा चरण 1970 के दशक में आया, जब ईस्ट अफ्रीका से निकाले गए भारतीय मूल के लोग ब्रिटेन पहुंचे और उन्होंने कारोबार खड़े किए। तीसरा चरण उच्च शिक्षा और स्किल्ड प्रोफेशनल्स का था, जबकि चौथा और मौजूदा चरण ब्रेक्जिट और कोविड के बाद का है, जहां भारतीय टैलेंट हेल्थकेयर और टेक सेक्टर में बड़ी जरूरत बन चुका है।

रिपोर्ट को हाउस ऑफ लॉर्ड्स में लॉन्च किया गया, जो यह दर्शाता है कि ब्रिटेन में भारतीय प्रवासी समुदाय के योगदान को अब उच्च स्तर पर भी मान्यता मिल रही है।

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