
खेल डेस्क : हरारे के मैदान पर जब 14 साल के Vaibhav Suryavanshi ने इंग्लैंड के खिलाफ 80 गेंदों में 175 रन ठोके, तो पूरी क्रिकेट दुनिया सन्न रह गई। अंडर-19 वर्ल्ड कप के फाइनल जैसे बड़े मुकाबले में ऐसा तूफान कम ही देखने को मिलता है। यह सिर्फ एक शानदार पारी नहीं थी, बल्कि भारतीय क्रिकेट के भविष्य की एक झलक थी।

15 छक्के, बेखौफ शॉट्स और मैच पर पूरी तरह कब्जा वैभव की इस पारी ने साबित कर दिया कि प्रतिभा उम्र नहीं देखती। सोशल मीडिया से लेकर क्रिकेट पंडितों तक, हर कोई यही कहता नजर आया “ये लड़का जल्द ही टीम इंडिया में दिखेगा।” लेकिन यहीं पर कहानी में एक अहम मोड़ आता है।

दरअसल, चाहकर भी Board of Control for Cricket in India फिलहाल वैभव को सीनियर टीम में मौका नहीं दे सकती। वजह है International Cricket Council का न्यूनतम उम्र नियम। ICC के नियमों के मुताबिक, किसी भी खिलाड़ी को अंतरराष्ट्रीय सीनियर क्रिकेट खेलने के लिए एक तय उम्र पूरी करनी होती है। वैभव अभी उस मानक से नीचे हैं।
यह नियम इसलिए बनाए गए हैं ताकि कम उम्र के खिलाड़ियों पर जरूरत से ज्यादा दबाव न पड़े और उनका शारीरिक-मानसिक विकास संतुलित तरीके से हो सके। इतिहास गवाह है कि जल्दबाजी कई बार करियर को नुकसान भी पहुंचा सकती है।

हालांकि, वैभव के लिए रास्ते बंद नहीं हैं। घरेलू क्रिकेट, इंडिया A, और IPL जैसे मंच उनके लिए तैयार हैं। वहां प्रदर्शन कर वे खुद को और निखार सकते हैं। आने वाले कुछ साल उनके करियर की नींव मजबूत करेंगे।
ICC Under-19 Cricket World Cup 2026 में उनकी यह ऐतिहासिक पारी आने वाले समय में याद रखी जाएगी। यह वही पारी है, जिसने एक किशोर को रातों-रात राष्ट्रीय उम्मीद बना दिया।
हिंदी पट्टी के क्रिकेट प्रेमियों के लिए वैभव सूर्यवंशी अब सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि एक सपना हैं ऐसा सपना, जो बताता है कि छोटे शहरों और कम उम्र से भी बड़े सितारे निकल सकते हैं। अगर सब कुछ सही दिशा में चलता रहा, तो वह दिन दूर नहीं जब यही नाम टीम इंडिया की जर्सी में देश के लिए रन बरसाता नजर आएगा।
फिलहाल इंतजार है एक परिपक्व, मजबूत और और भी खतरनाक वैभव सूर्यवंशी के अंतरराष्ट्रीय मैदान पर उतरने का।









