
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को “छत्तीसगढ़ @ 25: शिफ्टिंग द लेंस” किताब पर आयोजित कॉन्क्लेव इवेंट में महत्वपूर्ण बयान दिए। इस दौरान उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा 2000 में छत्तीसगढ़ के निर्माण का जिक्र किया और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से तुलना करते हुए यह कहा कि “बिना विचारधारा वाली राजनीतिक पार्टी देश का विकास नहीं कर सकती।”
बता दें, अमित शाह ने अपनी बातों में कहा कि जब छत्तीसगढ़, झारखंड और उत्तराखंड के निर्माण के लिए आंदोलन हो रहे थे, तब कांग्रेस सरकार सत्ता में थी। उस समय कांग्रेस ने कहा था कि विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है, इसलिए वह नए राज्य बनाने की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस का तर्क था कि छोटे राज्य कैसे काम करेंगे?
वहीं, शाह ने कहा, “विरोध होते रहे, लेकिन जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने यह निर्णय लिया कि छोटे राज्यों का निर्माण सिर्फ एक एक्सपेरिमेंट नहीं है, बल्कि यह अपने नागरिकों की इच्छा को पूरा करने के लिए किया गया है।”
बता दें, इस दौरान उन्होंने यह भी बताया कि बहुत से लोग शासन को सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया के रूप में देखते हैं, जबकि इस प्रक्रिया में विचारधारा का भी अहम स्थान है। शाह ने उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री बनने के समय तीन राज्यों का बंटवारा हुआ था और मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री बनने पर आंध्र प्रदेश और तेलंगाना का बंटवारा हुआ।
अमित शाह ने कहा, “अटल जी के समय में जब तीन राज्यों को बांटा गया, तो लोकसभा और विधानसभा में सब कुछ आसानी से हो गया था। लेकिन जब मनमोहन सिंह के समय में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना का बंटवारा हुआ, तब लोकसभा में आंध्र प्रदेश के सभी नेताओं को कानून पास करने से बाहर रखा गया था। इसके बाद भी दोनों राज्यों के बीच कई दिक्कतें बनी हुई हैं।”
केंद्रीय गृह मंत्री ने राजनीति में विचारधारा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, “जो लोग इसे सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया मानते हैं, वे आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे हालात पैदा करते हैं। बिना विचारधारा वाली कोई राजनीतिक पार्टी देश का विकास नहीं कर सकती।”









