
भोपाल: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (BTR) में हाल ही में हुई बाघों की मौतों की जांच के संबंध में महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। अदालत ने 25 फरवरी तक वन्यजीव विशेषज्ञ अजय दुबे द्वारा दायर याचिका के तहत एक विस्तृत स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
बता दें, बाघों की मौतों में कथित अस्वाभाविक मौतों के मामलों को लेकर याचिका दायर की गई थी। यह आदेश चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने 11 फरवरी 2026 को सुनवाई के दौरान दिया।
याचिकाकर्ता अजय दुबे ने 4 जनवरी को राज्य में बाघों की मौतों की जांच की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। उन्होंने वन अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया और बाघों की मौतों में अनियमितताओं की शिकायत की। सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता के वकील आदित्य संघी ने प्रस्तुत किया कि 20 जनवरी 2026 के बाद भी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों की मौतें अस्वाभाविक कारणों से हुई हैं, जिनमें बाघों के बीच लड़ाई के अलावा भी अन्य कारण शामिल हैं।
बता दें, अदालत ने बाघों की मौतों के कारणों का चार्ट दाखिल किए जाने के बाद कहा, “कुछ मामलों में बाघों की मौत अस्वाभाविक कारणों से हुई हैं, जैसे कि मानव हस्तक्षेप।” इसके बाद, अदालत ने बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर को आदेश दिया कि वह बाघों की मौतों पर स्थिति रिपोर्ट पेश करें। साथ ही, जहां भी अस्वाभाविक मौतों की रिपोर्ट हुई है, वहां की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी दाखिल की जाए। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाए कि उन व्यक्तियों के खिलाफ क्या कदम उठाए गए हैं, जो बाघों की मौतों के लिए जिम्मेदार पाए गए हैं।
बता दें, मध्य प्रदेश में 2025 में कुल 54 बाघों की मौत हुई थी। वहीं, 2026 के पहले महीने में ही नौ बाघों की मौत हो चुकी है, जो पिछले साल की तुलना में एक बड़ा उछाल दर्शाता है।कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 25 फरवरी 2026 को निर्धारित किया है। जिसमें कोर्ट ने सारी स्थिति रिपोर्ट मांगी है।









