
पीलीभीत में शिक्षा विभाग के DIOS कार्यालय में एक करोड़ रुपये से ज्यादा के घोटाले में सिर्फ एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी इलहाम शम्सी को निलंबित कर खानापूर्ति कर दी गई, जबकि आरोप है कि इस पूरे खेल में कई बड़े अफसरों की मिलीभगत रही। जांच में सामने आया है कि चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी की पत्नी अर्शी खातून के बैंक खाते में करीब एक करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ। DIOS कार्यालय से जुड़े पैसे का ट्रांजेक्शन ट्रेज़री विभाग से हुआ है ।
घोटालेबाज, भ्रष्टाचारी अफसरों को बचाने के लिए खानापूर्ति,
एक करोड़ से ज्यादा का ट्रांजेक्शन DIOS राजीव कुमार क कार्यकाल में हुआ है इस घोटाले में ट्रेज़री ऑफिस और अन्य अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ निचले स्तर के कर्मचारी को सस्पेंड कर मामला दबाने की कोशिश की गई।
जांच कमेटी अध्यक्ष CDO राजेंद्र कुमार श्रीवास घोटालेबाजों की ढाल,
जांच समिति के अध्यक्ष रहे CDO राजेंद्र कुमार पर भी सवाल उठ रहे हैं कि उन्होंने कथित रूप से बड़े अधिकारियों को बचाने का काम किया। सबसे गंभीर बात यह है कि करोड़ों के इस घोटाले में अब तक कोई एफआईआर तक दर्ज नहीं कराई गई। घोटाले में शामिल कई अफसरों की गर्दन फंसती देख मामले को अंदर ही अंदर निपटा दिया गया, और मुख्य दोषियों को बचा लिया गया।
शिक्षा विभाग में करोड़ों का खेल, एफआईआर भी नहीं,
अब सवाल यह है कि आखिर इतने बड़े घोटाले में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी फिलहाल, यह मामला शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। कि जिस कर्मचारी की पत्नी के खाते में करोड़ों का ट्रांजेक्शन हुआ उस पर अभी तक मुकदमा भी दर्ज नहीं हुआ है ।









