MahaShivratri 2026: सर्वार्थसिद्धि योग में करें भगवान शिव की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त और व्रत विधि

शिव मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें, जिससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सुख-शांति व समृद्धि की प्राप्ति होती है।

महाशिवरात्रि 2026 का पर्व इस बार विशेष रूप से खास माना जा रहा है, क्योंकि इस दिन सर्वार्थसिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस योग में भगवान शिव की पूजा करने से हर मनोकामना पूर्ण होती है और जीवन की सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं। इस पावन अवसर पर फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को चार पहर में शिव पूजा का विशेष महत्व होता है।

महाशिवरात्रि 2026 का शुभ मुहूर्त:

ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 5:21 बजे से 6:12 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:15 बजे से 12:59 बजे तक

निशिता काल – 15 फरवरी की रात 12:11 बजे से 1:02 बजे तक

प्रदोष काल – शाम 6:00 बजे से रात 8:38 बजे तक

महाशिवरात्रि 2026 का चार प्रहर का शुभ मुहूर्त:

प्रथम प्रहर – 15 फरवरी, शाम 6:11 से रात 9:23 तक

द्वितीय प्रहर – रात 9:23 से 12:36 तक

तृतीय प्रहर – रात 12:36 से सुबह 3:47 तक

चतुर्थ प्रहर – 16 फरवरी, सुबह 3:47 से 6:59 तक

व्रत विधि और पूजा का सही तरीका
महाशिवरात्रि के दिन, ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र पहनें। इस दिन काले कपड़े पहनने से बचना चाहिए। इसके बाद घर के पूजा स्थान पर दीपक जलाएं और व्रत का संकल्प लें। भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करें। पूजा में बेलपत्र, धतूरा, भांग, फल, फूल, चंदन, रोली और अक्षत अर्पित करें। अगर संभव हो तो मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र चढ़ाएं।

शिव मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें, जिससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सुख-शांति व समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस दिन, सर्वार्थसिद्धि योग में की गई पूजा और साधना को विशेष फलदायी माना जाता है।

महाशिवरात्रि का पर्व केवल भक्ति का अवसर नहीं है, बल्कि यह जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति पाने का एक महत्वपूर्ण समय है। भक्त इस दिन व्रत रखकर भगवान शिव की पूजा करके अपने जीवन को उन्नति की दिशा में बढ़ा सकते हैं।

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