‘धुरंधर 2’ में खान साब का योगदान, नुसरत फतेह अली खान की कव्वाली को दी नई आवाज

'धुरंधर 2' में खान साब का योगदान जबरदस्त रहा है, खासकर नुसरत फतेह अली खान की मशहूर कव्वाली 'दिल पे जख्म खाते हैं' को रीक्रिएट करके। जानें कौन हैं खान साब और उनकी प्रेरणा।

‘धुरंधर 2’ का म्यूजिक दर्शकों को जबरदस्त तरीके से प्रभावित कर रहा है, और इसमें प्रमुख योगदान उन गायकों का है जिन्होंने संगीत को अपनी आवाज दी है। इनमें से एक हैं खान साब, जिन्होंने नुसरत फतेह अली खान की प्रतिष्ठित कव्वाली ‘दिल पे जख्म खाते हैं’ को अपनी आवाज दी है।

कौन हैं खान साब ?

खान साब, जिनका असली नाम इमरान खान है, कपूरथला के भंडाल डोना गांव में पैदा हुए थे और जालंधर में पले-बढ़े। बचपन से ही संगीत में रुचि रखने वाले खान साब, नुसरत फतेह अली खान से बेहद प्रभावित थे और उन्हें अपना उस्ताद मानते थे। पांच साल की उम्र में ही उन्होंने संगीत की तालीम लेना शुरू कर दिया था, लेकिन आर्थिक तंगी के चलते उनकी कॉलेज की पढ़ाई बीच में ही छूट गई। इसके बाद उन्होंने छोटे-मोटे काम किए, लेकिन फिर गैरी संधू की रहनुमाई में संगीत में अपना करियर फिर से शुरू किया। गैरी संधू ने ही खान साब को उनका मंचीय नाम दिया। उनका 2018 का गाना ‘जिंदगी तेरे नाल’ YouTube पर 200 मिलियन व्यूज पार कर गया, और नुसरत फतेह अली खान से उनकी तुलना होने लगी।

‘धुरंधर 2’ में खान साब का योगदान

‘धुरंधर 2’ के लिए खान साब ने जो संगीत दिया है, उसे कई लोग साउंडट्रैक की जान मानते हैं। म्यूजिक डायरेक्टर शाश्वत सचदेव ने 1977 की कव्वाली ‘मैकदाह’ से ‘जान से गुजरते हैं’ को नए अंदाज में पेश किया, जिसमें नुसरत फतेह अली खान की विरासत को आगे बढ़ाया है, और खान साब ने इसमें जान फूंक दी है। 17 मार्च को मुंबई में हुए म्यूजिक लॉन्च पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें रणवीर सिंह खान साब से यह कव्वाली गाने की गुजारिश करते नजर आ रहे हैं। इसके अलावा, खान साब ने फिल्म के जोशीले टाइटल ट्रैक ‘आरी-आरी’ में भी अपना योगदान दिया।

‘भारत दा नुसरत फतेह अली खान’ का टैग

खान साब को अक्सर ‘भारत दा नुसरत फतेह अली खान’ कहा जाता है, और यह टैग उन्हें उनके पंजाबी सूफी गायकी के लिए दिया गया है। ‘धुरंधर 2’ में उन्होंने नुसरत फतेह अली खान की मशहूर कव्वाली ‘दिल पे जख्म खाते हैं’ को फिर से पेश किया है। इस ट्रैक को ‘धुरंधर 2’ के म्यूजिक लॉन्च के दौरान खान साब ने लाइव गाया था। इस कव्वाली का इस्तेमाल फिल्म के एक किरदार के परिचय के दौरान किया गया, जिसने थिएटर में एक शानदार माहौल बना दिया।

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