चंदौली : 24 घंटे में तीन बेगुनाहों की हत्या करने वाले ‘साइको किलर’ का पुलिस एनकाउंटर में अंत

चंदौली, उत्तर प्रदेश। 24 घंटे से भी कम समय में चलती ट्रेनों और एक निजी अस्पताल में तीन निर्दोष लोगों की बेरहमी से गोली मारकर हत्या कर पूरे क्षेत्र में आतंक का पर्याय बने ‘साइको किलर’ गुरप्रीत सिंह का अंत आखिरकार पुलिस मुठभेड़ में हो गया। मुठभेड़ के बाद जब पुलिस ने आरोपी के काले बैग की तलाशी ली, तो उसके अंदर मिली सामग्री देख अनुभवी पुलिसकर्मियों के भी होश उड़ गए।

सेना के रिटायर्ड जवान गुरप्रीत के कब्जे से बेल्ट में करीने से लगे अलग-अलग बोर के 28 जिंदा कारतूस, एक काले रंग की लाइसेंसी रिवॉल्वर और एक डबल बैरल गन बरामद हुई। जांच में खुलासा हुआ कि अधिक घातक बनाने के लिए उसने डबल बैरल गन की नली को छोटा भी करा लिया था।

आरा में छूटी नौकरी, शराब की लत ने बनाया हत्यारा

पुलिस के अनुसार, गुरप्रीत सिंह 2021 में सेना से सेवानिवृत्त हुआ था। इसके बाद वह बिहार के आरा में एक निजी सुरक्षा गार्ड की नौकरी करने लगा, लेकिन शराब की बढ़ती लत के कारण उसकी नौकरी छूट गई। इसके बाद से ही वह गहरे मानसिक तनाव और अत्यधिक गुस्से में रहने लगा था। 29 अप्रैल को वह अमृतसर से सीधे बिहार के आरा पहुंचा और लगातार भटकता रहा।

रविवार सुबह शुरू हुआ खौफनाक सिलसिला

घटनाक्रम की शुरुआत रविवार सुबह हुई, जब गुरप्रीत ने डीडीयू-ताड़ीघाट पैसेंजर ट्रेन में सकलडीहा के पास जमानियां निवासी यात्री मंगरू की कनपटी पर गोली मारकर हत्या कर दी और शव को चलती ट्रेन से नीचे फेंक दिया। कुछ ही घंटों बाद, उसने सियालदह-जम्मूतवी एक्सप्रेस में गया (बिहार) निवासी दूसरे यात्री दिनेश साहू के सिर में गोली मार दी।

अस्पताल में भी नहीं माना खौफ, भर्ती महिला मरीज को मारी गोली

सोमवार सुबह इस साइको किलर ने तीसरी वारदात को अंजाम दिया। वह अलीनगर थाना क्षेत्र के कमलापुर गांव स्थित एक निजी अस्पताल में पहुंचा और वहां भर्ती बिहार के भभुआ निवासी महिला मरीज लक्ष्मीना देवी की सिर में गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस के मुताबिक, तीनों पीड़ितों से गुरप्रीत का दूर-दूर तक कोई निजी संबंध नहीं था। वह पूरी तरह से रैंडम तरीके से लोगों को अपना शिकार बना रहा था।

हत्या के बाद भागने की कोशिश, ग्रामीणों ने दबोचा

तीसरी हत्या के बाद मौके से भागने की कोशिश कर रहे गुरप्रीत को साहसी ग्रामीणों ने दौड़ाकर पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। हालांकि, कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। 9 मई को प्रयागराज के रास्ते पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पहुंचे गुरप्रीत ने अपने सैन्य प्रशिक्षण का नमूना पेश करते हुए पुलिस हिरासत में भी एक पुलिसकर्मी का असलहा छीन लिया।

एनकाउंटर में दो पुलिसकर्मी घायल, ढेर हुआ हत्यारा

पुलिस द्वारा चारों ओर से घिरे होने के बावजूद, गुरप्रीत लगातार फायरिंग कर रहा था। मुठभेड़ के दौरान उसकी गोली से एक सब-इंस्पेक्टर और एक जीआरपी जवान घायल हो गए। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने उसे ढेर कर दिया। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि अगर ग्रामीणों ने समय रहते उसे पकड़कर पुलिस को नहीं सौंपा होता, तो उसके पास मौजूद असलहों और भारी मात्रा में बारूद से वह एक बड़ा नरसंहार कर सकता था। फिलहाल, तीनों शवों का पोस्टमार्टम कराकर पुलिस ने आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

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