
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब एक ऐसा खुलासा हुआ है, जिसने पूरी जाँच प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद की शिकायत पर नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन (NABL) ने स्पष्ट किया है कि मध्यांचल डिस्कॉम की जिस हाई-टेक लैब से तकनीकी समिति ने मीटर के नमूनों की जाँच कराई थी, उसे इस तरह के ‘एक्सेप्टेंस टेस्ट’ करने की मान्यता ही प्राप्त नहीं है।
तकनीकी समिति पर भी उठे सवाल, 10 दिन की रिपोर्ट अब तक गायब
बता दें कि स्मार्ट मीटर की गुणवत्ता पर उठ रही शिकायतों के मद्देनज़र 12 अप्रैल को एक चार सदस्यीय तकनीकी समिति गठित की गई थी। इस समिति में आईआईटी कानपुर के दो प्रोफेसर, वड़ोदरा के इलेक्ट्रिकल रिसर्च एंड डेवलपमेंट एसोसिएशन के अनुभाग प्रमुख और पावर कॉरपोरेशन के निदेशक (वितरण) शामिल हैं। समिति को स्मार्ट मीटरों का तकनीकी परीक्षण कर 10 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी थी, लेकिन करीब दो महीने बीतने के बाद भी रिपोर्ट सामने नहीं आई है। अब NABL के इस खुलासे ने समिति की जाँच प्रक्रिया पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
‘स्वतंत्र जाँच हो और दोषियों पर गिरे गाज’
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने NABL के जवाब के बाद कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि मध्यांचल विद्युत वितरण निगम ने अपनी लैब को भारतीय मानकों के अनुरूप स्मार्ट मीटर के एक्सेप्टेंस टेस्ट के लिए अधिकृत बताया था, जो कि अब पूरी तरह गलत साबित हो चुका है। वर्मा ने माँग की है कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) अधिनियम या गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित अधिकारियों एवं संस्थाओं के विरुद्ध कठोर से कठोर कार्रवाई अमल में लाई जाए। गौरतलब है कि प्रदेश में अब तक 86 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं और सरकार उपभोक्ताओं की शिकायतों के चलते पुराने मीटर बदलने पर पहले ही रोक लगा चुकी है।









