लखनऊ विश्वविद्यालय में गूंजा छात्रों का आक्रोश, फीस वृद्धि और निष्कासन के खिलाफ महापंचायत में जुटे सैकड़ों छात्र

लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि, भ्रष्टाचार के आरोपों, छात्र हितों की अनदेखी और मनमाने ढंग से किए गए निष्कासन के विरोध में शुक्रवार को एक बड़ी छात्र महापंचायत का आयोजन किया गया। परिसर में जुटे भारी जमावड़े ने एक स्वर में विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए अपनी मांगों पर अड़े रहने का संकल्प लिया। इस सभा में निष्कासित किए जा चुके छात्रनेता प्रेम प्रकाश, प्रिंस प्रकाश और हर्षित शुक्ला भी विशेष रूप से मौजूद रहे और उन्होंने मंच से छात्र समुदाय का आह्वान किया कि वे अपने अधिकारों की लड़ाई से पीछे न हटें।

महापंचायत को संबोधित करते हुए प्रेम प्रकाश ने प्रशासन पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि समस्याओं के समाधान की बजाय छात्रों की आवाज को बेरहमी से दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा को महँगा करने और छात्र विरोधी फैसलों के खिलाफ यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक प्रशासन को झुकना नहीं पड़ता। वहीं प्रिंस प्रकाश ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से सवाल उठाने पर छात्रों को निष्कासित किया जा रहा है, जो अभिव्यक्ति की आजादी पर सीधा हमला है। हर्षित शुक्ला ने परिसर की बदहाली का मुद्दा उठाते हुए कहा कि बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी हो रही है और इन्हें ठीक करने के बजाय छात्र नेताओं को निशाना बनाकर माहौल खराब किया जा रहा है।

इस मौके पर विभिन्न छात्र संगठनों के प्रमुख चेहरों ने भी एकजुटता का परिचय दिया। समाजवादी छात्रसभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महेंद्र कुमार यादव ने इसे केवल फीस का नहीं, बल्कि शिक्षा और लोकतांत्रिक अधिकारों को बचाने का आंदोलन करार दिया। वहीं आइसा के प्रदेश अध्यक्ष मनीष कुमार ने कहा कि देशभर में शिक्षा को महँगा और छात्रों की आवाज को कमजोर करने का जो खेल चल रहा है, लखनऊ विश्वविद्यालय का यह संघर्ष उसी का अहम हिस्सा है। एनएसयूआई के प्रदेश महासचिव शुभम खरवार ने भी प्रशासन पर भेदभाव और दमन का आरोप लगाते हुए निष्कासन तत्काल वापस लेने की मांग रखी।

महापंचायत में उपस्थित भारी भीड़ ने एक स्वर में चेतावनी दी कि यदि फीस वृद्धि को तत्काल प्रभाव से वापस नहीं लिया गया, निष्कासित छात्रों की बहाली नहीं हुई और भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच शुरू नहीं की गई, तो आंदोलन को पूरे प्रदेश में व्यापक रूप दे दिया जाएगा।

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