लखनऊ में एसटीएफ की बड़ी कार्रवाई, 4 हथियार तस्करों को किया गिरफ्तार, 50 कारतूस और 2 पिस्टल बरामद

STF के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से गैंग के एक्टिव होने के संकेत मिल रहे थे। एडिशनल सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस अमित कुमार नागर के निर्देश पर इंस्पेक्टर दिलीप कुमार तिवारी अपनी टीम के साथ सर्चिंग कर रहे थे।

लखनऊ : UP STF ने एक इंटर-स्टेट अवैध हथियार और कारतूस तस्करी करने वाले गैंग के 4 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। बता दे कि आरोपियों के पास से दो सेमी-ऑटोमैटिक .32 बोर पिस्टल, चार मैगज़ीन, 50 ज़िंदा कारतूस, सात कारतूस, एक होंडा सिटी कार, मोबाइल और कैश बरामद किया गया है।

STF के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से गैंग के एक्टिव होने के संकेत मिल रहे थे। एडिशनल सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस अमित कुमार नागर के निर्देश पर इंस्पेक्टर दिलीप कुमार तिवारी अपनी टीम के साथ सर्चिंग कर रहे थे। इसी बीच, एक टिप-ऑफ के आधार पर बुधवार रात करीब 11:50 बजे गाज़ीपुर थाना इलाके में कल्याण अपार्टमेंट तिराहे से समता मूल चौराहे की ओर जाने वाले बंधा मार्ग पर एक होंडा सिटी कार में 4 आरोपियों को पकड़ा गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान BBD निवासी संदेश प्रताप सिंह उर्फ ​​राज, गोमतीनगर निवासी विवेक प्रजापति, चिनहट निवासी नितिन कुंडी और प्रिंस गुप्ता उर्फ ​​सल्लू भाई के रूप में हुई है।

साथियों के साथ मिलकर गैर-कानूनी हथियार और कारतूस खरीदता-बेचता था

पूछताछ में मुख्य आरोपी नितिन कुंदी ने बताया कि वह अपने साथियों के साथ मिलकर गैर-कानूनी हथियार और कारतूस खरीदता-बेचता है। इससे पहले वह सिंथेटिक ड्रग्स और ऑर्गेनिक गांजा (OG) की तस्करी में भी शामिल था। करीब दो साल पहले पुलिस एनकाउंटर में उसके पैर में गोली लगी थी।

जेल से छूटने के बाद, उसने दुश्मन गैंग से बदला लेने, रंगदारी के लिए हथियार खरीदने और ड्रग्स की डीलिंग के लिए इस धंधे में कदम रखा। चिनहट थाने में उसके खिलाफ कई क्रिमिनल केस दर्ज हैं और उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।

हथियारों का इस्तेमाल जमीन पर कब्जा करने के लिए करता था

आरोपी संदेश प्रताप सिंह ने पूछताछ में बताया कि वह एक रियल एस्टेट कंपनी में पार्टनर है। जमीन पर कब्जा करने और लूटपाट के मामलों में लोगों को डराने के लिए अवैध हथियारों का इस्तेमाल किया जाता था। आरोपियों ने खुलासा किया कि उन्हें अवैध हथियार गोरखपुर निवासी अभिषेक उर्फ ​​अभि सप्लाई करता था। वे करीब 25 हजार रुपये में एक पिस्टल खरीदते थे और उसे 50 से 60 हजार रुपये में बेचते थे, जबकि वे .32 बोर का कारतूस 300-350 रुपये में खरीदते थे और उसे 400 से 500 रुपये में बेचते थे।

माफिया बाबू सिंह के संरक्षण में चल रही थीं।

पूछताछ में आरोपियों ने यह भी माना कि वे रंगदारी और जमीनों पर अवैध कब्जे का काम करते हैं। ये गतिविधियां माफिया बाबू सिंह के संरक्षण में चल रही थीं। बरामद होंडा सिटी कार का इस्तेमाल हथियारों की तस्करी और दूसरे क्रिमिनल कामों में किया जाता था। STF ने आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है और उनके नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों की तलाश शुरू कर दी है।

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