राम मंदिर गबन मामले में 6 जुलाई को ट्रस्ट की अहम बैठक, चंपत राय के इस्तीफे और SIT की गोपनीय रिपोर्ट पर मचेगा घमासान!

राम मंदिर में 'रामधन' गबन मामले को लेकर इस समय सरगर्मियां तेज हैं। इस पूरे विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की 6 जुलाई को दोपहर 3 ...

अयोध्या: राम मंदिर में ‘रामधन’ गबन मामले को लेकर इस समय सरगर्मियां तेज हैं। इस पूरे विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की 6 जुलाई को दोपहर 3 बजे मणिराम दास छावनी में एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। इस बैठक के एजेंडे और प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

SIT की गोपनीय रिपोर्ट पर उठे सवाल

इस बैठक के एजेंडे में सबसे बड़ा मुद्दा SIT investigation report (एसआईटी जांच रिपोर्ट) पर होने वाली चर्चा है। सूत्रों के अनुसार, दान-पात्रों से मिली राशि की गिनती को लेकर एसआईटी की अंतरिम रिपोर्ट ट्रस्ट के सामने रखी जाएगी।

अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या एसआईटी ने आधिकारिक तौर पर यह गोपनीय प्राथमिक जांच रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंप दी है? अगर नहीं सौंपी, तो इसे बैठक के एजेंडे में कैसे शामिल किया गया? जानकारों का कहना है कि जिन लोगों पर कथित तौर पर गबन या लूट का आरोप है, उनके पास ही जांच रिपोर्ट का होना कई सवाल खड़े करता है। इससे सबूत मिटाने, जरूरी कागजात गायब करने और गवाहों के बयान बदलवाने का खतरा बढ़ जाता है।

चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर विचार

बैठक के एजेंडे में सबसे पहले ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे (resignation) पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा, मंदिर प्रबंधन की नई व्यवस्था, खाली पड़े पदों पर चयन और अन्य जरूरी मुद्दों पर भी बातचीत होनी है।

बिना हस्ताक्षर वाले पत्र और अध्यक्षता पर असमंजस

इस महत्वपूर्ण बैठक की सूचना को लेकर भी एक नया विवाद खड़ा हो गया है। कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि के नाम से जो सूचना पत्र जारी हुआ है, उस पर न तो कोई हस्ताक्षर हैं और न ही डिजिटल सिग्नेचर। इससे पहले चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे की खबर भी ऐसे ही बिना हस्ताक्षर वाले पत्र के जरिए सामने आई थी।

इसके साथ ही, बैठक की अध्यक्षता कौन करेगा, इसे लेकर भी स्थिति साफ नहीं है। ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास इस समय लखनऊ के अस्पताल में भर्ती हैं। अगर वे इस बैठक में शामिल नहीं हो पाते हैं, तो 6 जुलाई की इस संवेदनशील और अहम बैठक की कमान कौन संभालेगा, इस पर असमंजस बरकरार है।

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