
नई दिल्ली: भारत के टेलीकॉम और नेटवर्क उपकरण क्षेत्र (TANE) में तेज विकास की संभावनाएं हैं, लेकिन चीन पर अधिक आयात निर्भरता घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात बढ़ाने के लिए तत्काल नीतिगत समर्थन की जरूरत को दर्शाती है। NITI Aayog की रिपोर्ट के अनुसार, मजबूत नीतिगत कदमों से यह क्षेत्र GDP में अपना योगदान दोगुना कर सकता है और 2035 तक भारत को 50 अरब डॉलर के निर्यात हब के रूप में स्थापित कर सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, TANE क्षेत्र वैश्विक कनेक्टिविटी की रीढ़ है, लेकिन वर्तमान में यह महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। इस क्षेत्र में लक्षित हस्तक्षेप की जरूरत है ताकि नेशनल टेलीकॉम पॉलिसी 2025 (NTP-25) के लक्ष्यों को हासिल किया जा सके।
रिपोर्ट में बताया गया कि 2020-24 के दौरान घरेलू टेलीकॉम और नेटवर्क उपकरण निर्यात कुल निर्यात का केवल 0.2-0.3 प्रतिशत रहा, जबकि आयात 4-5 अरब डॉलर सालाना था। इसमें 80 प्रतिशत से अधिक आयात चीन से होने की बात कही गई है।
NITI Aayog ने बताया कि टेलीकॉम उपकरण निर्माण वैश्विक सप्लाई चेन पर निर्भर है, जिससे किसी एक बाजार में व्यवधान आने पर जोखिम बढ़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया कि भारतीय कंपनियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के मुकाबले अधिक वित्तीय बोझ का सामना करना पड़ता है।
रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए Production Linked Incentive (PLI) योजना सहित कई पहल की हैं। लगातार समर्थन से टेलीकॉम और नेटवर्क उपकरण क्षेत्र GDP में 1-1.5 प्रतिशत तक योगदान दे सकता है, 5 लाख नौकरियां पैदा कर सकता है और 2035 तक भारत को 50 अरब डॉलर का निर्यात हब बना सकता है।








