
संयुक्त राज्य अमेरिका के अखबार वाल स्ट्रीट जर्नल के एक विज्ञापन से उठा विवाद काफी बढ़ गया है. अखबार ने एक विज्ञापन छापा जिसमें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को वांटेड बताया गया है.
विज्ञापन में निर्मला सीतारमण समेत कुल 14 लोगो को वांटेड की सूची में शामिल किया गया है. विज्ञापन के नीचे एक क्युआर कोड भी दिया गया है जिसको स्कैन करने पर अमेरिकी वेबसाइट थिंक टैंक फ्रंटियर्स खुल जाती है, जिसमें इस विज्ञापन का विस्तृत विवरण दिया गया है. अखबार में दिये गये विज्ञापन में वित्त मंत्री समेत कुल 14 शख्सियतों के नाम शामिल किये गये हैं. जिसमें इन सभी को वांटेड बताकर प्रतिबंध लगाने की मांग की है.
इसमें आगे कहा गया है कि इन सभी ने भारत की संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक और उद्योग जगत के अपने विरोधियों के खिलाफ हथियारों की तरह इस्तेमाल किया है. वाल स्ट्रीट जर्नल के विज्ञापन में निवेशकों को भारत में निवेश करने के लिये भी चेताया गया है. अखबार ने भारत को निवेशकों के लिए असुरक्षित जगह बताया और केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि सरकार द्वारा केंद्रीय एजेंसियों पर नियंत्रण के कारण देश ने अपनी विश्वसनीयता खो दी है.
सूची में सुप्रीम कोर्ट के जज हेमंत गुप्ता, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, एंट्रिक्स कॉर्प के चेयरमैन राकेश शशिभूषण, वी रामसुब्रमण्यम, स्पेशल पीसी एक्ट जज चंद्रशेखर, सीबीआई डीएसपी आशीष पारीक, ED निदेशक संजय कुमार मिश्रा और सॉलिसिटर जनरल एन वेंकटरमन के नाम भी शामिल हैं.
इस विज्ञापन में ईडी के सहायक निदेशक आर राजेश और उप निदेशक ए सादिक मोहम्मद का भी नाम भी है. भारत ने इसको गैर जिम्मेदाराना हरकत बताते हुये इसका खण्डन किया है. सरकार ने इस हरकत को भारत को बदनाम करने की साजिश बताया है. इसके साथ ही सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की तरफ से वरिष्ठ सलाहकार कंचन गुप्ता ने इस विज्ञापन के लिए देवास मल्टीमीडिया के पूर्व सीईओ रामचंद्रन विश्वनाथन को जिम्मेदार ठहराया है. भारत में इसके विरोध के साथ ही अखबार के सम्पादकों से माफी की भी मांग की गयी है. गौरतलब है कि विज्ञापन तब प्रकाशित हुआ जब निर्मला सीतारमण अमेरिका के दौरे पर ही गयी हुई थीं.









