
निकाय चुनाव में आरक्षण को लेकर लखनऊ हाई कोर्ट आज अपना फैसला सुनाएगा। शनिवार को प्रदेश में निकाय चुनाव से जुड़ी बड़ी खबर आई थी जिसमें पिछड़ी जाति आरक्षण को लेकर इलाहबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया था और आज मंगलवार को अपना फैसला सुनाएगा।
इससे पहले शनिवार को कोर्ट में सरकार और याची पक्ष के वकीलों ने कोर्ट में अपनी-अपनी दलीलें रखीं। निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण की अनदेखी को लेकर अदालत में कुल 64 याचिकाएं पड़ी हैं। शनिवार को सुनवाई के दौरान सरकार ने अदालत में कहा कि पिछले चुनाव में आरक्षण की प्रक्रिया इस चुनाव की तरह ही थी, लेकिन तब इस मामले को लेकर अदालत में कोई याचिका नहीं पड़ी थी। सरकारी वकील की इस दलील पर अदालत ने सख्त टिप्पणी की और कहा कि अगर आप के पास डाटा है तो दीजिए।
उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव यानी कि शहर की सरकारों की समयावधि 14 से 19 दिसंबर के बीच समाप्त हो गई है। ऐसे में निकाय चुनाव को लेकर सरगर्मियां जोरों पर है। सभी की नजर हाईकोर्ट के आदेश पर टिकी हुई हैं। नगर निगम के चुनाव को लेकर कुछ दिनों पहले आरक्षण सूची जारी की थी, जिसे लेकर इलाहबाद हाईकोर्ट में कई जनहित याचिकाएं दायर की गई थी, इस याचिका में आरक्षण नियमों को लेकर सवाल उठाये गए थे, जिस पर कोर्ट में पिछले कई दिनों से सुनवाई हो रही है और शनिवार को छुट्टी के दिन भी इस मामले में सुनवाई हुई और आज मंगलवार को छुट्टी के दिन इस पर फैसला आएगा।
गौरतलब है कि इस संबंध में पहली सुनवाई के दौरान सरकार ने कहा था कि साल 2017 के आरक्षण के सर्वे को आधार माना जाए। हलफनामे में राज्य सरकार ने कहा कि इसी सर्वे को ट्रिपल टेस्ट माना जाए। फिलहाल मामले के निस्तारण तक चुनाव अधिसूचना जारी करने पर रोक जारी रहेगी। अब सभी की निगाहें आज यानि मंगलवार 27 दिसंबर को कोर्ट के फैसले पर रहेगी।
हाईकोर्ट में 24 दिसंबर से लेकर 31 दिसंबर तक शीतकालीन अवकाश है। गुरुवार और शुक्रवार को सुनवाई न हो पाने के कारण शनिवार को अवकाश होने के बाद भी कोर्ट ने दोनों पक्षों के अनुरोध पर सुनवाई करने का निर्णय लिया है। और इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। आज यानी मंगलवार को हाईकोर्ट अपना फैसला सुनाएगा।









