
Desk : राष्ट्रपति के अभिभाषण पर पीएम मोदी ने धन्यवाद प्रस्ताव पर लोकसभा में जवाब दिया और विपक्ष पर जमकर प्रहार किया.आज दुनिया की हर विश्वसनीय संस्था, हर एक्सपर्ट, जो भविष्य का अच्छे से अनुमान भी लगा सकते हैं, उन सबको आज भारत को लेकर बहुत आशा और काफी हद तक उमंग है. इसका कारण है कि भारत में अस्थिरता नहीं है.
दिल्ली
— भारत समाचार | Bharat Samachar (@bstvlive) February 8, 2023
➡लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन
➡मोदी पर लोगों का भरोसा विपक्ष की समझ से बाहर है
➡विपक्ष के गलत-गलीच आरोपों पर देश को भरोसा नहीं
➡मुफ्त राशन लाभार्थी क्या झूठ पर भरोसा कर पाएंगे@narendramodi @PMOIndia @BJP4India #PMModi pic.twitter.com/U5pROJI5GH
महामारी के दौर में हमने 150 से ज्यादा देशों को संकट के समय दवाई और वैक्सीन पहुंचाई. यही कारण है कि आज कई देश वैश्विक मंचों पर खुले मन से, भारत का धन्यवाद देते हैं, भारत का गौरवगान करते हैं.कोरोनाकाल में बहुत से देश अपने नागरिकों की आर्थिक मदद करना चाहते थे, लेकिन असमर्थ थे. यह भारत है यहां फ्रैक्शन ऑफ सेकंड में लाखों-करोड़ों रुपये देशवासियों के खातों में जमा कर रहा था. एक समय देश छोटी-छोटी तकनीक के लिए तरसता था. आज देश टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है.
भारत में नई संभावनाएं हैं, कोरोनाकाल ने पूरी दुनिया की सप्लाई चैन को हिलाकर रख दिया. आज भारत उस कमी को पूरा करने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहा है. कई लगों को यह बात समझने में काफी देर हो जाएगी.
भारत आज मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभर रहा है।दुनिया भारत की इस समृद्धि में अपनी समृद्धि देख रही है। निराशा में डूबे हुए कुछ लोग इस देश की प्रगति को स्वीकार ही नहीं कर पा रहे हैं।पिछले 9 वर्ष में भारत में 90 हजार स्टार्टअप्स आए हैं। हम दुनिया में इस मामले में तीसरे नंबर पर पहुंच गए हैं। हमारा स्टार्टअप ईकोसिस्टम देश के टियर-टू, टियर थ्री शहरों में पहुंचा है.मोबाइल निर्माण में आज भारत दूसरा बड़ा देश बन गया है। डोमेस्टिक एयर ट्रैफिक में आज हम विश्व में तीसरे नंबर पर हैं। एनर्जी कंजप्शन में आज भारत दुनिया में तीसरे नंबर पर है।अक्षय ऊर्जा क्षमता में चौथे नंबर पर पहुंचे हैं.
उन 10 सालों में भारत की आवाज वैश्विक मंचों पर इतनी कमजोर थी कि दुनिया सुनने को तैयार नहीं थी. UPA की पहचान यह थी कि इन्होंने हर मौके को मुसीबत में पलट दिया. तकनीक के समय ये 2G घोटाले में फंसे रहे और सिविल न्यूक्लियर डील के समय ये ‘कैश फॉर वोट’ में फंसे रहे. 2004 से 2014 आजादी के इतिहास में घोटाला का दशक रहा. दस साल भारत के हर कोने में आतंकवादी हमलों का सिलसिला चलता रहा। हर नागरिक असुरक्षित था. 10 साल में कश्मीर से लेकर पूर्वोत्तर तक देश हिंसा का शिकार था.
आतंकवाद पर सीना तान कर हमले करने का इनके पास सामर्थ नहीं था और10 साल तक मेरे देश के लोगों का खून बहता रहा. 2014 से पहले के दशक को लॉस्ट डिकेड के नाम से जाना जाएगा और 2030 का दशक अब भारत दशक के नाम से जाना जाएगा. देश में हर स्तर, हर क्षेत्र में, हर सोच में आशा ही आशा नजर आ रही है. सपने और संकल्प लेकर चलने वाला देश है लेकिन कुछ लोग ऐसे निराशा में डूबे हुए हैं कि क्या कहें. काका हाथरसी ने कहा था-आगा-पीछा देख कर, क्यों होते गमगीन जैसी जिसकी भावना वैसा दिखे सीन.
आज UPA की पहचान यही है कि इन्होंने हर मौके को मुसीबत में पलट दिया. जब टेक और इनफार्मेशन का युग तेजी से बढ़ रहा थो तो ये 2G में फंसे रहे. सिविल न्यूक्लियर डील की चर्चा थी तो ये कैश फॉर वोट में फंसे रहे. 2010 में राष्ट्रमंडल खेल हुए, CWG घोटाले में पूरा देश बदनाम हो गया.









