
नई दिल्ली- ताज कॉरिडोर घोटाले में CBI को पहली अभियोजन स्वीकृति मिली है. इसको लेकर NPCC के तत्कालीन एजीएम पर केस चलेगा. जिसकी सुनवाई 22 मई को होगी. ताज कॉरिडोर घोटाले में अभियोजन की स्वीकृति मिलने से बसपा सुप्रीमो मायावती व पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. पहले मायावती के खिलाफ प्रोसिडिंग ड्रॉप हो गई थी. इस मामले में अपील अब भी सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है. ताज कॉरिडोर का प्रोजेक्ट 175 करोड़ का था.
लखनऊ
— भारत समाचार | Bharat Samachar (@bstvlive) April 25, 2023
➡️ताज कॉरिडोर घोटाले में CBI को मिली पहली अभियोजन स्वीकृति
➡️NPCC के तत्कालीन एजीएम पर चलेगा केस सुनवाई 22 मई को
➡️बढ़ सकती है बसपा सुप्रीमो मायावती,नसीमुद्दीन की परेशानियां
➡️मायावती के खिलाफ ड्रॉप हो गयी थी प्रोसिडिंग
➡️मामले में अपील अब भी सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग…
क्या है ताज कॉरिडोर प्रोजेक्ट घोटाला?
साल 2002 में यूपी की तल्कालीन सीएम मायावती ने ताजमहल की खूबसूरती को बढ़ाने के लिए 175 करोड़ के ताज कॉरिडोर प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी. मायावती पर आरोप लगा था कि पर्यावरण मंत्रालय से मंजूरी मिले बगैर सरकारी खज़ाने से 17 करोड़ रुपये स्वीकृत कर दिए गए. मामला हाईलाइट हुआ तो 2003 में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को जांच करने के आदेश दिए. 2007 में सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की. लेकिन तब मायावती सत्ता में वापस आ गईं. उस समय के राज्यपाल टीवी राजेश्वर ने केस चलाने की अनुमति देने से मना कर दिया. जिससे कोर्ट में चल रही कार्यवाही ठप हो गई.









