आपसी सहमति से तलाक पर सुप्रीम कोर्ट ने जारी की नई गाइडलाइन, जानिए, शीर्ष अदालत ने क्या कहा?

न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, संजीव खन्ना, एएस ओका, विक्रम नाथ और जेके माहेश्वरी की 5-न्यायाधीशों की पीठ ने माना कि सुप्रीम कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 142(1) के तहत शक्तियों का प्रयोग कर सकता है.

सुप्रीम कोर्ट की एक संविधान पीठ ने स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट भारत के संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विशेष शक्तियों का उपयोग कर सकती है, ताकि हिंदू धर्म की धारा 13-बी के अनुसार आपसी सहमति से तलाक लेने के लिए निर्धारित 6 से 8 महीने की प्रतीक्षा अवधि को समाप्त किया जा सके.

हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13-बी के अनुसार, आपसी सहमति से तलाक की मांग करने वाला पहला प्रस्ताव दाखिल करने के बाद, पक्षकारों को दूसरा प्रस्ताव पेश करने से पहले कम से कम छह महीने और अधिकतम 18 महीने तक इंतजार करना पड़ता है. यह ‘कूलिंग ऑफ पीरियड’ विधायिका द्वारा अनिवार्य है ताकि पार्टियों को आत्मनिरीक्षण करने और निर्णय पर फिर से विचार करने का अवसर मिल सके.

न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, संजीव खन्ना, एएस ओका, विक्रम नाथ और जेके माहेश्वरी की 5-न्यायाधीशों की पीठ ने माना कि सुप्रीम कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 142(1) के तहत शक्तियों का प्रयोग कर सकता है. पार्टियों के बीच समझौते और अनुदान के मद्देनजर हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13-बी के तहत निर्धारित अवधि और प्रक्रिया के साथ आपसी सहमति से तलाक की डिग्री पारित की जा सकती है और समय अवधि को समाप्त किया जा सकता है.

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