प्राधिकरण की लापरवाही और घपले से बह जाता है सालाना 90 करोड़, जलभराव की समस्या से हर कोई परेशान

शुरूआती बारिश ने जल निकासी की पूरी पोल खोल कर रख दी है।जलनिकासी की व्यवस्था के लिए सालाना 90 करोड़ खर्च होता है उसके बावजूद चारों तरफ बस पानी ही पानी भरा है।

नोएडा: बारिश की शुरूआत हो गई है, बारिश होते ही चारों तरफ बस पानी ही पानी नजर आ रहा है, शहरों मे जिधर देखो उधर लोग पानी की समस्या से परेशान हैं। सरकार जल निकासी के लिए बड़े पैमाने पर पैसा खर्च करती है उसके बावजूद बारिश होते ही इन व्यवस्थाओं की पूरी पोल खुल जाती है।

नोएडा में जलनिकासी की व्यवस्था के लिए सालाना 90 करोड़ खर्च होता है उसके बावजूद पूरे नोएडा में चारों तरफ बस पानी ही पानी भरा है। नोएडा में नालियों की सफाई पर 10 करोड़, रखरखाव पर 70 करोड़ और अतिक्रमण हटाने पर 10 करोड़ खर्च होता है और इस बार यह बजट करीब 121 करोड़ का है। उसके बाद भी नोएडा बदहाली छेल रहा है।

सालाना इतनी बडी धनराशि खर्च करने के पीछे यह उद्देश्य है कि बारिश का पानी छोटी- बड़ी नालियों से होते हुए सिंचाई नाले तक जाए और आगे पानी नदी में चला जाए। लेकिन हर बार पानी आगे नहीं जाकर बैक फ्लो हो जाता है। जिससे सेक्टरों में जलभराव हो जाता है। जलभराव की समस्या का कोई एक कारण नही है इसमें नोएडा प्राधिकरण की कई लापरवाही और घपले शामिल हैं।

इतनी बड़ी धनराशि खर्च होने के बावजूद नालियों की सफाई तक सही से नही हो पाती जिसके कारण भी बड़ी मात्रा में जलभराव की समस्या उत्पन्न हो जाती है। प्राधिकरण के कर्मी बड़े अतिक्रमण पर ही पूरा फोकस रखते हैं। सेक्टरों के जगह-जगह के अतिक्रमण पर कभी हाथ नहीं डालते।

अंडरपास में पानी निकालने के लिए पंप और नाली की व्यवस्था की समुचित व्यवस्ता ने होने से कई जगह सोसाइटि वासियों को बडी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। ग्रेटर नोएडा औद्योगिक सेक्टर साइट सी के तीन अंडरपास में पानी भरने से सोसाइटियों वालों के साथ-साथ आने जाने वाले हजारों लोग परेशान हैं।


अंडरपास में लगे पंपों ने कुछ देर काम किया, लेकिन नाली नहीं होने के कारण पानी वापस अंडरपास में भर गया। लोगों का आरोप है कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (डीएफसीसीआईएल) और प्राधिकरण ने अपना काम सही तरीके से नहीं किया। जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

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