आज मंदिरों में जन्म लेंगे कृष्ण कन्हाई, जन्माष्टमी के दिन करें विशेष उपाय, खुश हो जाएंगे कान्हा!

जन्माष्टमी का पर्व पूरे भारत में ज़ोरो-शोरो से मनाया जाता है, यही नहीं विदेश में भी जन्माष्टमी धूम-धाम से मनाई जाती है। श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था और इसी दिन पूरी दुनिया में उनका जन्मदिन मनाया जाता है। इस साल 6 और 7 दोनो दिन जन्माष्टमी मनाई जा रही है।

डिजिटल डेस्क– जन्माष्टमी का पर्व पूरे भारत में ज़ोरो-शोरो से मनाया जाता है, यही नहीं विदेश में भी जन्माष्टमी धूम-धाम से मनाई जाती है। श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था और इसी दिन पूरी दुनिया में उनका जन्मदिन मनाया जाता है। इस साल 6 और 7 दोनो दिन जन्माष्टमी मनाई जा रही है।मान्यतानुसार, भक्त श्रीकृष्ण के बाल रूप की पूजा करते हैं। इस दिन श्रीकृष्ण के लिए भक्त व्रत भी रखते हैं। देशभर में यह त्योहार हर्षो-उल्लास से मनाया जाता है। इस दिन श्रीकृष्ण के जीवन की झाकियां लगाई जाती हैं, लोग घरो में भी तरह-तरह की सजावट करते है। ऐसी मान्यता है कि जन्माष्टमी पर विधि पूर्वक पूजन करने से घर में सुख-शांति वैभव आता है और सफलता भी मिलती है। धार्मिक मान्यता है कि कृष्ण जी के बाल रूप का पूजन रात्रि में उनके जन्म के समय ही करना शुभ होता है।

आइये जानते है पूजा की विधि,कैसे करे श्रृंगार और भगवान् श्री कृष्ण को प्रसन्न करने के लिए भोग में क्या अर्पित करे।
श्रीकृष्ण के श्रृंगार में फूलों का महत्व खास है उन्हें तरह तरह के फूल अर्पित करे। पीले रंग के वस्त्र और चंदन की सुगंध से भगवान का श्रृंगार करें. इसमें काले रंग का प्रयोग बिल्कुल न करें. वैजयंती के फूल श्री कृष्ण को अर्पित करना बेहद शुभ मन जाता है।

जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण को पंचामृत जरूर अर्पित करें। उसमें तुलसी दल भी जरूर डालें. मेवा, माखन और मिसरी का भोग भी लगाएं. कुछ जगहों पर धनिये की पंजीरी भी अर्पित की जाती है। माखन मिश्री लड्डू गोपाल को अत्यंत ही पसंद है माखन मिश्री ज़रूर अर्पित करे। जन्माष्टमी की सुबह स्नान करके व्रत, पूजा का संकल्प लें। दिनभर जलाहार या फलाहार ग्रहण करें और सात्विक रहें. मध्य रात्रि को भगवान कृष्ण की धातु की प्रति प्रतिमा को किसी पात्र में रखें, उसे पहले दूध, फिर दही, फिर शहद व शक्कर और अंत में घी से स्नान कराएं, इसी को पंचामृत स्नान कहते हैं। इसके बाद कान्हा को जल से स्नान कराएं।

ध्यान रखें कि अर्पित की जाने वाली चीजें शंख में डालकर ही अर्पित करें। पूजा करने वाला व्यक्ति इस दिन काले या सफेद वस्त्र धारण ना करें. मनोकामना के मंत्र जाप करें. प्रसाद ग्रहण करें और दूसरों में भी बांटें।

जन्माष्टमी पर उपवास करने का बहुत महत्व है। मान्यता है, कि इस दिन व्रत-जप और ध्यान करने से व्यक्ति की 21 पीढ़ियां तर जाती हैं। इस व्रत से व्यक्ति के घर सुख-शांति, समृद्धि आती है, उसके और उसके परिवार का स्वास्थ्य अच्छा होता है. शादी में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। संतान प्राप्ति होती है और पति-पत्नी और पति-पत्नी के रिश्तों में मधुरता आती है।

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