अयोध्या में श्री रामलला के प्राण प्रतिष्ठा में शामिल नहीं होंगे ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य, वजह जानकर सभी है हैरान !

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में 22 जनवरी को श्री रामलला के प्राण प्रतिष्ठान को लेकर तैयारियां जोरो पर है। देशभर में आमंत्रण पत्र बांटे जा रहे है। इस भव्य और दिव्य आयोजन में संत, नेता, प्रबुद्धजन के साथ तमाम लोग शामिल होकर भगवान श्री राम के प्रति अपनी श्रद्धा दर्शाने के व्याकुल है। वही इन सबके बीच ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने श्री रामलला के प्राण प्रतिष्ठा में शामिल नही होने की बात कह सभी को चौका दिया है

रिपोर्ट : नीरज कुमार जायसवाल, वाराणसी

वाराणसी। उत्तर प्रदेश के अयोध्या में 22 जनवरी को श्री रामलला के प्राण प्रतिष्ठान को लेकर तैयारियां जोरो पर है। देशभर में आमंत्रण पत्र बांटे जा रहे है। इस भव्य और दिव्य आयोजन में संत, नेता, प्रबुद्धजन के साथ तमाम लोग शामिल होकर भगवान श्री राम के प्रति अपनी श्रद्धा दर्शाने के व्याकुल है। वही इन सबके बीच ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने श्री रामलला के प्राण प्रतिष्ठा में शामिल नही होने की बात कह सभी को चौका दिया है। वाराणसी में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अयोध्या मंदिर में तब तक नही जाने की बात कही जब तक देश में गौ रक्षा कानून पारित नही हो जाता हैं। उन्होंने कहा कि मैं किस मुंह से भगवान श्री राम का दर्शन करूंगा, भगवान श्री राम का अवतार गाय की रक्षा के लिए हुआ था और आज भी देश में गाय काटी जा रही है।

गाय के सवाल पर कांग्रेस की राह पर न चले नई सरकार, कांग्रेस की तरह रसातल में चले जाएंगे

देश में गौ हत्या को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सरकार को चेताया है। उन्होंने कहा कि देश के आजादी से पहले कांग्रेस अपने अधिवेशन में गाय की रक्षा का मुद्दा उठती थी, लेकिन सत्ता में आने के 70 साल कांग्रेस ने गाय को भुला दिया। पहले कांग्रेस ने गाय को भुनाया और सत्ता में आते ही भुला दिया और जिसकी वजह से आज कांग्रेस रसातल में चली गई। ऐसे में देश की नई सरकार (बीजेपी) को कांग्रेस की तरह यदि गाय को भूल जाएगी तो वह भी कांग्रेस की तरफ रसातल में चली जाएगी।

गौ -प्रतिष्ठा आंदोलन का आवाह्न, देशभर से गौ सेवक वृंदावन में करेंगे सभा

गाय की रक्षा को लेकर 4 जनवरी को देशभर के गौ सेवक वृंदावन में सभा कर आंदोलन की रणनीति को तैयार करेंगे। 15 जनवरी से 23 जनवरी तक दिल्ली में गौ – प्रतिष्ठा आंदोलन किया जाएगा। यदि इसके बाद भी बात नही बनती है, तो 30 जनवरी को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री के साथ सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्रक सौंपा जाएगा। जिसके बाद 6 फरवरी को प्रयागराज में गौ – संसद का आयोजन किया जाएगा। वही 10 मार्च को दिल्ली में देशभर के गौ सेवक जुटकर गाय माता को राष्ट्र माता प्रतिष्ठा दिलाने का प्रयास करेंगे।

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