UP Politics: दलित वोट साधने में जुटी BSP, आकाश ने खोली इतिहास की तिजोरी

2012 में सत्ता से बाहर होने के बाद बसपा का ग्राफ लगातार गिरता ही चला गया। 2017 विधानसभा चुनाव में पार्टी को मात्र 19 सीटें मिली।

UP Politics: 18 जुलाई, 2017 वही दिन था जब बसपा प्रमुख मायावती यूपी के सहारनपुर में दलित विरोधी हिंसा लेकर बयान दे रही थी, सभापति ने जल्द बात खत्म करने के लिए कह दिया इससे नाराज बहन जी ने राज्यसभा से ये कहते हुए इस्तीफा देते हुए कहा कि जब मैं अपने समाज की बात नहीं रख सकती हूं, तो मेरे यहां होने का क्या फायदा है। अब पार्टी इसे लोकसभा चुनाव 2024 में भुनाने में जुट गई है। पिछले कुछ चुनावों में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई बहुजन समाज पार्टी अब दलितों के लिए किए गए पार्टी के कार्यों को गिनाने में जुटी है। इसको लेकर पार्टी के उत्तराधिकारी आकाश आनंद भी लगातार एक्टिव हैं।

आकाश ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर मायावती के इस्तीफे वाला वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा कि, “जिस सदन में हमारे समाज की आवाज़ न सुनी जा रही हो, तो उस सदन से इस्तीफा देकर समाज को ना झुकने देने की आवाज़ बनी थी बहनजी।” इस पोस्ट के साथ बसपा ने एक बार फिर से दलित वोट पर निशाना साधा है।

बता दें कि 2012 में सत्ता से बाहर होने के बाद बसपा का ग्राफ लगातार गिरता ही चला गया। 2017 विधानसभा चुनाव में पार्टी को मात्र 19 सीटें मिली। जबकि 2022 में मात्र एक सीट पर ही संतोष करना पड़ा। वहीं, लोकसभा चुनाव की बात करें तो 2014 में बसपा को एक भी सीट नहीं मिली। लोकसभा चुनाव 2019 में सपा बसपा गठबंधन को कुल 15 सीटें मिली। जिसमें बसपा को 10 जबकि सपा को पांच सीटें मिली।

अब लोकसभा चुनाव 2024 बसपा के लिए प्रतिष्ठा का चुनाव बन गया है। यदि इस चुनाव में क्लीन स्वीप हो जाती है, तो आने वाला समय पार्टी के लिए मुश्किलों भरा होने वाला है। क्योंकि उत्तर प्रदेश विधानसभा में बसपा का सिर्फ एक सदस्य है। जबकि राज्यसभा और विधान परिषद में में पार्टी का कोई सदस्य नहीं है। ऐसे में यदि इस बार पार्टी इस बार क्लीन स्वीप हो जाती है, तो लोकसभा में भी पार्टी का पक्ष रखने वाला कोई नहीं रहेगा।

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