
लोकसभा चुनाव 2024 में कुछ ही महीने बचे हैं। लेकिन INDIA गठबंधन में अभी सीट शेयरिंग को लेकर बात नहीं बन पाई है। इसके लिए कई बैठकें हुई लेकिन सब निरर्थक साबित हुआ। इसी बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फरुख अब्दुल्ला का संगठन को लेकर बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने इंडी गठबंधन में फूट पड़ने की बात कही है। फारुख अब्दुल्ला ने पूर्व मंत्री कपिल सिब्बल के साथ उनके यूट्यूब चैनल पर बात करते हुए कहा कि यदि गठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर घटक दलों के बीच सहमति नहीं बनती है, तो एलायंस में शामिल कुछ पार्टियां अलग हो सकती हैं।
गठबंधन में अलग गुट बनने की आशंका
फारुख अब्दुल्ला ने कहा कि लोकसभा चुनाव में काफी कम समय बचा है। समय रहते सीटों का बंटवारा हो जाना चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता है, तो एलायंस के लिए खतरा हो सकता है। इसके बाद उन्होंने कहा कि देश को बचाने के लिए मतभेदों को भुलाकर देश के बारे में सोचना होगा।
उन्होंने आशंका जताया कि यदि सीट शेयरिंग को लेकर बात नहीं बनती है, तो कुछ दल एक साथ आकर अलग गठबंधन खड़ा कर सकते हैं, जो आगामी चुनाव में चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। अभी समय है गठबंधन को इस विषय पर सोचना चाहिए।
लोकतंत्र खतरे में…आने वाली पीढ़ी हमें माफ नहीं करेगी
फारुख अब्दुल्ला ने कहा कि पार्टियों को वहीं से सीट की मांग करनी चाहिए, जहां पर उनकी अच्छी पकड़ हो। तभी जीत सकते हैं। जहां पर उनका दबदबा नहीं है, वहां से सीट मांगना गलत है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र खतरे में है। आने वाली पीढ़ी हमें माफ नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि यदि हम अहंकार त्याग कर साथ नहीं आते तो यह हमारी सबसे बड़ी गलती होगी।
फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि रामराज्य का मतलब सभी के लिए समानता है। हम सभी को रामराज्य का इंतजार है। उन्होंने कहा कि भगवान राम विश्व के राम थे। उम्मीद है एक दिन राम राज्य आएगा।
बता दें कि इंडिया गठबंधन में अभी तक सीटों का आवंटन नहीं हुआ है। लेकिन क्षेत्रीय पार्टियों ने अपनी डिमांड रखनी शुरू कर दिए हैं। गुरुवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्पष्ट कर दिया की वह अपने राज्य में किसी भी पार्टी से गठबंधन नहीं करेंगी। अब महाराष्ट्र से भी आवाज उठने लगी है। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी सीटों की डिमांड शुरू कर दी है।
संजय राउत ने दावा किया कि टूटने के बावजूद महाराष्ट्र में शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी है। पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी कुल 23 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। जिसमें से 18 सीटों पर जीते थे। इस बार भी इतने ही सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र में शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार गुट) के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी।
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद से ही अखिलेश यादव भी कांग्रेस से कुछ नाराज चल रहे हैं। उन्होंने भी कई मौकों पर कहा कि यूपी में हम सीट दे रहे हैं। मांग नहीं रहे। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार कांग्रेस यूपी में उन 21 सीटों की मांग कर रही है, जहां पर 2009 में लड़ी थी। लेकिन यहां देखना होगा कि अखिलेश यादव राजी होते हैं कि नहीं।
इसके अलावा पंजाब में आम आदमी पार्टी भी अकेले चुनाव लड़ने की मूड में है। क्योंकि वहां पर आप की सरकार, कांग्रेस आलोचना करने से बनी है। ऐसे में यदि वहां पर कांग्रेस के साथ चुनाव लड़ती है तो आप को नुकसान हो सकता है।
तेलंगाना में केसीआर को हराने के बाद अब कांग्रेस भी वहां चंद्रसेखर राव के साथ गठबंधन नहीं करना चाहती है। यदि ऐसा होगा तो भाजपा को ही फायदा होगा। बिहार में भी नीतीश की पार्टी में भी कुछ सही नहीं चल रहा है। राजनीतिक जानकारों की माने तो इसका भी प्रभाव गठबंधन पर देखा जा सकता है।









