
ईरान और अमेरिका के बीच जिस बड़ी तबाही को लेकर पूरी दुनिया खौफ में थी। उसे लेकर अब दोनों की तरफ से सीजफायर का ऐलान किया गया है। अमेरिकी सेना ने इस संघर्ष विराम के लागू होने की पुष्टि की है और कहा है कि अब दोनों देशों के बीच हमले रोक दिए गए हैं। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस युद्धविराम पर सहमति जताई है और बताया कि ईरान की 10 सूत्रीय मांगों पर 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में बातचीत होगी।
ईरान की शर्तों पर सहमति और पाकिस्तान की भूमिका
ईरान ने दावा किया है कि उसकी शर्तें स्वीकार की गई हैं, और 10 अप्रैल से इस्लामाबाद में वार्ता शुरू होगी। ईरान ने एक बार फिर अपनी मांग दोहराई है कि पूरे इलाके से अमेरिकी सेना को हटाया जाए। इस संघर्ष विराम के लिए पाकिस्तान के अलावा सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पाकिस्तान ने इस युद्धविराम की घोषणा के बाद अमेरिका और ईरान को 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में वार्ता के लिए आमंत्रित किया है।
पाकिस्तान द्वारा वार्ता का आयोजन
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा, “हमने अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडलों को 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में आमने-सामने की बातचीत के लिए आमंत्रित किया है।” उनका कहना है कि इसका उद्देश्य सभी विवादों को सुलझाने के लिए एक निर्णायक समझौते पर पहुंचना है। यह संघर्ष एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया था, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अमेरिका ईरान की सभ्यता को खत्म कर देगा।
व्हाइट हाउस का बयान और ट्रंप के दूतों की पाकिस्तान यात्रा
व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने इस वार्ता को लेकर कहा कि, “लोग बात करते हैं, लेकिन जब तक प्रेसिडेंट या व्हाइट हाउस की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आता, तब तक कुछ भी फाइनल नहीं है।” हालांकि, अन्य अधिकारियों ने पुष्टि की है कि यह मीटिंग इस्लामाबाद में होगी, जिसमें पाकिस्तानी मीडिएटर भी शामिल होंगे। इसके अलावा, ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, उनके दामाद जेरेड कुशनर और वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस भी इस बातचीत के लिए पाकिस्तान पहुंच चुके हैं।









