
उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले से एक दर्दनाक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने अंधविश्वास और इलाज में देरी के खतरों को एक बार फिर उजागर कर दिया है। यहां एक किशोर अमित को सांप ने काट लिया, लेकिन परिजनों ने उसे तुरंत अस्पताल ले जाने के बजाय अंधविश्वास का सहारा लिया, जिसके चलते उसकी जान चली गई।
जानकारी के अनुसार, सांप के काटने के बाद परिजन किशोर को अस्पताल ले जाने के बजाय गंगा नदी के किनारे ले गए और करीब 12 घंटे तक उसे गंगा की लहरों में रखा। उनका मानना था कि पानी में रखने से शरीर से सांप का जहर निकल जाएगा। इस दौरान किशोर की हालत लगातार बिगड़ती रही, लेकिन परिजन उसे तांत्रिकों और झाड़-फूंक के चक्कर में भी लेकर जाते रहे।
समय बीतता गया और इलाज में लगातार देरी होती रही। जब तक परिवार को स्थिति की गंभीरता का एहसास हुआ, तब तक किशोर की हालत बेहद नाजुक हो चुकी थी। बाद में उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
स्थानीय लोगों के अनुसार, यदि परिजन समय पर उसे नजदीकी अस्पताल लेकर पहुंचते और वैज्ञानिक इलाज करवाते, तो उसकी जान बचाई जा सकती थी। लेकिन अंधविश्वास और गलत मान्यताओं ने एक मासूम की जिंदगी छीन ली। इस घटना ने एक बार फिर समाज में फैले अंधविश्वास पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सांप के काटने के मामलों में सबसे महत्वपूर्ण समय होता है, और तुरंत एंटी-वेनम इलाज ही जीवन बचाने का एकमात्र तरीका है।
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग लगातार लोगों को जागरूक करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी झाड़-फूंक और तांत्रिक प्रथाओं पर विश्वास देखने को मिलता है। यह घटना पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है कि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मेडिकल सहायता लेना ही सबसे सही और सुरक्षित विकल्प है। समय पर इलाज ही जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर तय करता है।








