
अज़ाज़ का सफर: खुद से सीखी तकनीकी और 3डी प्रिंटिंग से सफलता की ओर
अज़ाज़ ने मध्य प्रदेश के किमोर गांव में एक सामान्य परिवार में जन्म लिया और तकनीकी ज्ञान में गहरी रुचि थी। 13 साल की उम्र से उन्होंने वीडियो एडिटिंग, ग्राफिक डिजाइन, एनीमेशन, और फोटोशॉप जैसे कौशल सीखे, लेकिन उन्हें औपचारिक शिक्षा और मार्गदर्शन की कमी थी। ASDC से प्राप्त प्रशिक्षण के बाद उन्होंने 3D प्रिंटिंग, डिज़ाइन टूल्स, और AI जैसी तकनीकों में दक्षता प्राप्त की, जिससे उनके आत्मविश्वास और नेटवर्किंग में भी सुधार हुआ। अब वे स्वतंत्र रूप से हार्डवेयर/सॉफ़्टवेयर समस्याओं को हल करने के साथ-साथ अनुकूल उत्पाद भी बना रहे हैं।

लक्ष्मी भंडारी: गृहिणी से नौकरीपेशा महिला तक का परिवर्तन
लक्ष्मी भंडारी का जीवन शादी के बाद घर और बच्चों की देखभाल में सिमट गया था, लेकिन वह फिर भी शिक्षा की ओर अपनी इच्छा बनाए रखती थीं। ASDC वाडी में ‘डोमेस्टिक डाटा एंट्री ऑपरेटर’ और ‘AI के बुनियादी ज्ञान’ का कोर्स करने के बाद उन्होंने खुद को फिर से पेशेवर रूप से स्थापित किया। आज वह एक शिक्षक के रूप में काम कर रही हैं और महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन गई हैं।

मलीहा तामसील: अस्थिर काम से स्थिरता की ओर
मलीहा का जीवन अस्थिर था, जहां परिवार का पालन-पोषण किसी निश्चित रोजगार से नहीं, बल्कि मौसमी कामों से होता था। ASDC वाडी के जनरल ड्यूटी असिस्टेंट कोर्स ने मलीहा को स्वास्थ्य देखभाल और चिकित्सा क्षेत्र में रोजगार की दिशा दिखाई। अब वह एक स्थिर पेशेवर करियर में काम कर रही हैं, और अपनी वित्तीय स्वतंत्रता से न केवल अपने परिवार को मदद पहुंचा रही हैं, बल्कि अपने छोटे भाई की पढ़ाई को भी सुनिश्चित कर रही हैं।

मोहम्मद रेहान कुरेशी: आत्मविश्वास की ओर पहला कदम
मोहम्मद रेहान, जो कभी अपने आप पर विश्वास नहीं कर पाते थे, ASDC वाडी के जनरल ड्यूटी असिस्टेंट कोर्स से खुद को पुनर्निर्मित करने का अवसर प्राप्त किया। यह कोर्स उन्हें न केवल चिकित्सकीय कार्यों में दक्ष बनाने में मदद करता है, बल्कि उन्होंने आत्मविश्वास भी पाया। आज वह एक सम्मानजनक पेशेवर करियर में काम कर रहे हैं और अपने परिवार के लिए गर्व का कारण बने हैं।










