
भोपाल: मध्य प्रदेश पुलिस महकमे से बड़ी खबर सामने आई है। सागर के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक (SP) और आईपीएस अधिकारी अनुराग सुजानिया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए 2 नवंबर को राज्य सरकार को अपना त्यागपत्र सौंपा। खास बात यह है कि सागर से तबादला होने के महज चार दिन बाद ही उन्होंने पुलिस सेवा छोड़ने का फैसला किया। जहरीली शराब कांड के बाद उन्हें एसपी पद से हटाकर पुलिस मुख्यालय भोपाल में सहायक पुलिस महानिरीक्षक (AIG) के पद पर तैनात किया गया था।
तबादले के बाद भोपाल पुलिस मुख्यालय में मिली थी नई जिम्मेदारी
जानकारी के मुताबिक, अनुराग सुजानिया का हाल ही में सागर जिले के पुलिस अधीक्षक पद से तबादला किया गया था। उन्हें भोपाल स्थित पुलिस मुख्यालय में एआईजी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। हालांकि, नई तैनाती संभालने के बजाय उन्होंने पुलिस सेवा से अलग होने का निर्णय लिया।
2 नवंबर को सरकार को इस्तीफा सौंपने की खबर सामने आने के बाद पुलिस महकमे में चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, अधिकारी ने अपने त्यागपत्र में व्यक्तिगत कारणों का उल्लेख किया है। उनके फैसले के पीछे किसी अन्य वजह की फिलहाल आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
बांदा जहरीली शराब कांड में हुई थी 16 लोगों की मौत
अनुराग सुजानिया उस समय चर्चा में आए थे, जब सागर जिले के बांदा में जहरीली शराब पीने से कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना ने पूरे मध्य प्रदेश में हलचल मचा दी थी। हादसे के बाद अवैध शराब के कारोबार और पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे थे।
घटना के बाद प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई करते हुए अनुराग सुजानिया को सागर एसपी के पद से हटा दिया गया था। इसके बाद उन्हें पुलिस मुख्यालय भोपाल में एआईजी के पद पर स्थानांतरित किया गया।
तबादले के महज चार दिन बाद इस्तीफे से चर्चाएं तेज
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा आईपीएस अधिकारी के इस्तीफे के समय को लेकर हो रही है। सागर से तबादला होने के बाद उन्हें नई जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन महज चार दिन के भीतर उन्होंने नौकरी छोड़ने का फैसला कर लिया।
हालांकि, इस्तीफे में व्यक्तिगत कारण बताए गए हैं, लेकिन जहरीली शराब कांड के बाद हुई प्रशासनिक कार्रवाई और फिर अचानक इस्तीफे ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
सरकार के फैसले पर टिकी नजरें
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि मध्य प्रदेश सरकार अनुराग सुजानिया का इस्तीफा स्वीकार करती है या इस संबंध में कोई अन्य प्रशासनिक प्रक्रिया अपनाई जाती है। अब सबकी नजरें राज्य सरकार के अगले फैसले पर टिकी हैं।









