
अमेरिका की नजर इन दिनों उन देशों के ऊपर में ज्यादा है जिनके पास तेल है या फिर बहुत सारा खनिज…और ऐसे छोटे-छोटे देशों पर लगता है अमेरिका ने अपनी पैनी नजर कर दी है…क्योंकि वेनेजुएला के साथ जो अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई की है…उनके पीछे भी तेल को ही वजह माना जा रहा है…चाहे वहां के राष्ट्रपति और कितने भी दूसरी वजहों को गिना दें…कि इस वजह से वेनेजुएला पर अटैक किया या फिर ये कि मादुरो तानाशाह था…पर असली सारी कहानी वेनेजुएला में मौजूद तेल की ही है…और अब बारी ग्रीनलैंड की दिखाई दे रही है…क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड को लेकर कई बेबाक बयान दे चुके है…जिनकी काफी ज्यादा चर्चाएं चल रही है….
दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक नई और विवादास्पद योजना के साथ सामने आए हैं, जिसमें वह ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने की कोशिश कर रहे हैं। यह कदम अमेरिका की सुरक्षा और रणनीतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है, लेकिन अब यह मुद्दा न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है, बल्कि कई यूरोपीय देशों ने इसे लेकर कड़ी चेतावनी भी दी है।
ट्रंप का मानना है कि ग्रीनलैंड अमेरिका के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, और यह देश खनिज संसाधनों से भरपूर होने के साथ-साथ आर्कटिक सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। ग्रीनलैंड में पाए जाने वाले रेयर अर्थ मिनरल्स, जैसे मोबाइल फोन, कंप्यूटर और बैटरियों के लिए आवश्यक खनिज, चीन के कब्जे में हैं, और अमेरिका इस संसाधन पर अपना अधिकार जमाने की कोशिश कर रहा है। साथ ही, ग्रीनलैंड की रणनीतिक स्थिति भी अहम है, क्योंकि यह आर्कटिक सर्कल में स्थित है, जो जलवायु परिवर्तन के कारण अब नए समुद्री रास्तों के लिए एक अहम क्षेत्र बन चुका है।
अब अमेरिकी अधिकारियों ने ग्रीनलैंड के नागरिकों को एकमुश्त राशि देने का प्रस्ताव रखा है, ताकि उन्हें डेनमार्क से अलग कर अमेरिका में शामिल किया जा सके। इस योजना में प्रति व्यक्ति 10,000 डॉलर से लेकर 1,00,000 डॉलर तक की रकम तय की गई है, जो कुल 6 बिलियन डॉलर तक हो सकती है। हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है और इसे लेकर सिर्फ अटकलें ही लगाई जा रही है…
इस विवाद ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है। फ्रांस, जर्मनी, इटली, पोलैंड, स्पेन और डेनमार्क ने संयुक्त बयान जारी कर अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है कि ग्रीनलैंड पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई की अनुमति नहीं दी जाएगी। डेनमार्क ने तो यह तक कह दिया है कि ग्रीनलैंड की संप्रभुता पर कोई भी हमला नाटो के अस्तित्व को खतरे में डाल सकता है।
यह मामला न केवल ग्रीनलैंड के अधिकारों पर प्रश्न उठाता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भी गहरी खाई उत्पन्न कर सकता है।









