अखिलेश ने केंद्र सरकर पर लगाया किसानों के प्रति संवेदनहीन होने का आरोप, कृषि कानूनों पर साधा केंद्र पर निशाना

अखिलेश ने आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा सरकार किसानों के प्रति संवेदनहीन है। उसे किसानों की मौत पर भी शर्म नहीं आ रही है। उन्होंने आगे कहा कि सत्ता तंत्र ने अपनी कुनीतियों से जनमानस और किसानों-नौजवानों को हताशा के अंधेरे में ढकेल दिया है। नौकरी नहीं, रोजगार नहीं फिर त्योहार का उत्साह, उमंग कहां? निराशा में डूबी जनता अब इसका करारा जवाब देगी।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गुरुवार को सपा कार्यालय में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में किसानों के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार और इसका नेतृत्व अपने किसान विरोधी आचरण के लिए कुख्यात है। दीपावली पर्व पर भी किसान अपनी मांगों को लेकर घर-परिवार से दूर धरना दे रहे हैं लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है।

उन्होंने किसानों के मुद्दों पर आगे अपनी बात रखते हुए कहा कि दीपावली के इस त्योहार पर भी किसानों के घरों में अंधेरा और मन में हताशा और निराशा है। फसल की एमएसपी पर बिक्री तो दूर क्रय केन्द्र ही नहीं खुल रहे हैं। बिचौलिए औने-पौने दामों पर किसानों का धान लूट रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि खाद के लिए किसान लम्बी-लम्बी कतारों में दिनभर लगे रहते हैं फिर भी खाद नहीं मिलती है। डीएपी, यूरिया और पोटाश खादे महंगी है और उपलब्ध भी नहीं है।

उन्होंने कृषि कानूनों पर बोलते हुए कहा कि किसानों की दो ही मांगे है या तो एमएसपी की अनिवार्यता बनाई रखी जाए या तीन काले कृषि कानूनों की वापसी हो। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा सरकार किसानों के प्रति संवेदनहीन है। उसे किसानों की मौत पर भी शर्म नहीं आ रही है। समाजवादी सरकार बनने पर ही किसानों को मिल सकेगा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा ने तो जनसामान्य, किसानों और नौजवानों के भविष्य के सभी रास्ते बंद कर रखे हैं। अब प्रदेशवासी मिलकर 2022 के चुनावों में भाजपा के सत्ता में आने के सभी रास्ते बंद कर देंगे।

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