अंबेडकर जयंती पर आम आदमी के बीच दिखे अखिलेश यादव, सड़क किनारे भंडारे में रुककर खाई पूड़ी-सब्जी

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मंगलवार को लखनऊ की सड़कों पर एक अलग अंदाज में नजर आए। बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती और बैसाखी के अवसर पर उन्होंने न केवल महापुरुषों को नमन किया, बल्कि सुरक्षा प्रोटोकॉल किनारे कर आम जनता के बीच बैठकर भंडारे का प्रसाद भी ग्रहण किया। इस दौरान उनके द्वारा दिए गए ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के संदेश ने सियासी गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।

प्रतिमा पर पुष्पांजलि और गुरुद्वारे में माथा टेका

मंगलवार सुबह अखिलेश यादव ने सबसे पहले बाबासाहेब अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके बाद वे बैसाखी के पर्व पर गुरु नानक देव जी का आशीर्वाद लेने सदर स्थित गुरुद्वारे पहुंचे। नीले रंग का गमछा गले में डाले सपा प्रमुख का यह स्वरूप वहां मौजूद लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना रहा।

जब अचानक रुकवा ली गाड़ी…

गुरुद्वारे से लौटते समय रास्ते में अंबेडकर जयंती के उपलक्ष्य में एक सार्वजनिक भंडारा चल रहा था। जनता का उत्साह देख अखिलेश यादव ने अचानक अपनी गाड़ी रुकवा दी और एक आम नागरिक की तरह जमीन पर बैठकर सब्जी-पूड़ी का स्वाद लिया। पूर्व मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर लोग काफी उत्साहित नजर आए। सोशल मीडिया पर उनकी इन तस्वीरों को सादगी और जनता से सीधे जुड़ाव के तौर पर देखा जा रहा है।

PDA को बताया सकारात्मक सोच की नई क्रांति

अखिलेश यादव ने इस विशेष अवसर पर सोशल मीडिया के माध्यम से देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और ‘पीडीए’ की अवधारणा को विस्तार से समझाया। उन्होंने लिखा कि बाबासाहेब के सिद्धांतों, लोहिया के मूल्यों और नेताजी (मुलायम सिंह यादव) के संघर्षों से प्रेरित होकर ‘पीडीए’ नामक एक नए समुदाय का जन्म हुआ है।

उन्होंने कहा, पीडीए हमारे देश के इतिहास में सकारात्मक सोच की एक नई क्रांति है। इसका उद्देश्य संघर्ष नहीं, बल्कि आपसी समन्वय, सद्भाव और सहयोग पर आधारित ‘सामाजिक न्याय के शासन’ को स्थापित करना है।

संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता

सपा प्रमुख ने अपने संदेश में जोर देकर कहा कि ‘पीडीए’ समाज सदियों के कष्ट और अपमान से निकलकर अब एक गरिमापूर्ण जीवन की ओर अग्रसर है। उन्होंने लिखा कि बिना किसी भेदभाव के समान अवसरों वाला वातावरण तैयार करना ही संवैधानिक और समाजवादी मूल्यों की सच्ची उपलब्धि होगी। उनके अनुसार, शोषितों और वंचितों को सम्मान दिलाना ही बाबासाहेब और लोहिया जी को सच्ची श्रद्धांजलि है।

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